बुधवार, 11 दिसंबर 2013

अपनी रोने की आदत नही,
धोखा देने की फितरत नही। 
औरों के हक़ पे डाका डाले,
ऐसी कोई भी जरूरत नही। 
मेरे बारे कोई पूछे,
ऐसी तो अपनी सूरत नही। 
मिल जाये मन का चाहा,
ऐसी तो अपनी किस्मत नही।
हंसने की हम सोचे कैसे,
"रैना" को गम से  फुरसत नही।  रैना"

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

दोस्तों के नाम आज की शाम 

तेरी नजरों ने काम कर दिया,
गुमनाम सरेआम कर दिया।
इक बार पिला के फेरी आंखें,
रस अंगूरी मेरे नाम कर दिया।
तेरी इन बावफा यादों ने तो,
मेरा जीना ही हराम कर दिया।
ठोकर खा कर हम सम्भले है,
उनको दूर से सलाम कर दिया।
ये सोच हम तसल्ली कर लेते, 
नाम है चाहे बदनाम कर दिया।
पैसे की इस बढ़ती भूख ने "रैना"
रिश्ते नाते को तमाम कर दिया। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

बुधवार, 21 अगस्त 2013

teri najro ne vo

तेरी नजरों ने काम कर दिया,
गुमनाम सरेआम कर दिया।
इक बार पीला के फेरी आंखें,
रस अंगूरी मेरे नाम कर दिया।
तेरी इन बावफा यादों ने तो,
मेरा जीना ही हराम कर दिया।
ठोकर खा कर हम सम्भले है,
उनको दूर से सलाम कर दिया।
ये सोच कर ही तसल्ली लेते हैं,
नाम है चाहे बदनाम कर दिया।
पैसे की इस बढ़ती भूख ने "रैना"
रिश्ते नाते को तमाम कर दिया। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

yad pida

भारत में ये कैसे दौर आ रहे हैं,
पहले फाइलों को चूहें कुतरते थे,
मगर देश में होती अनहोनी देखो
अब फाइलों को भेड़िये खा रहे हैं। राजेन्द्र रैना गुमनाम

चलो ये भ्रम भी मिटा लेते हैं ,
65 वर्षों से अजमा ही रहे हैं,
कोई फिट नही बैठा????
इस बार मोदी को अजमा लेते हैं।
वरना अधूरा ख्याल रह जाये गा,
मोदी को तो रहना ही है,
जनता को भी मलाल रह जाये गा।
बेशक हमें भावनाओं में नही बहना चाहिए,
इसे या उसे मलाल किसी को न रहना चाहिए।राजेन्द्र रैना गुमनाम 

मंगलवार, 20 अगस्त 2013

plkon ki chhav ne

पलकों की छांव में,सपनों के गांव में,
मजा बेसुमार है,प्यार ही प्यार यहां,
प्यार ही प्यार है प्यार ही प्यार …
दिलदारों की बस्ती मस्ती ही मस्ती है,
हर शै महंगी पर,मोहब्बत तो सस्ती है,
दिल के दरिचें खुले न कोई इन्कार है।
प्यार ही प्यार ………….
तुम आओ इस शहर में आ के तो देखो,
इक बार दिल से दिल मिला के तो देखो,
मिल जाती फिर दिल से दिल की तार है।
प्यार ही प्यार …………….
रैना"जो बची अब तो उसको संवारे गे,
पलकों की छांव में जिन्दगी गुजारे गे,
होगा न धोखा कभी हमें ये तो एतबार है।
प्यार ही प्यार……………राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ। …जय जय मां 

दोस्तों कमेंट्स करो न करो मगर पढ़ों जरुर

बेशक शहीदों का तो हरगिज न अपमान होना चाहिए,
जो देश पे न्यौछावर हुए उनका सम्मान होना चाहिए।
सेम सेम सेम अब इक ऐसी नई बात आई है प्रकाश में,
अमर शहीदों का नाम ही दर्ज नही रखा है इतिहास में।
मगर ये क्या हो रहा है अब सुभाष चन्द्र बोस के देश में,
चम्मचा चापलूस बेईमान प्रथम आ रहा हर इक रेस में।
देखो  ये नेता चम्मचागिरी में नया इतिहास बना रहे हैं,
तभी तो घोड़ो को घास न मिले गधें पंजीरी खा रहे हैं।
दफ्तर से फाइलें गायब,भ्रष्टाचार,डालर 63 से भी ऊपर है,
नेता फिर भी दावा कर रहे उनका राज एकदम से सुपर है।
पहले राजनीति में चलता बहन भाई चाचा भतीजा वाद,
मगर अब इन को पीछे छोड़ आगे आ चुके प्यारे दामाद।
लगता भारत में नेता भ्रष्टाचार का ऐसा रिकार्ड बनाये गे,
गुमनाम" दुनिया वाले देख कर दांतों तले ऊँगली दबायेगे। राजेन्द्र रैना गुमनाम 

o bhaiya

 ये भी हो सकता है
 ओ मेरे भईया प्यारे तू राखी के बन्धन को निभाना,
  इस बार न सौ दो सौ लूगी,पांच किलो प्याज ले आना।
  सब्जी को अब मुंह न लगते बिना छोंक के दाल है खाते,
  जो स्वाद दाल हो खानी तो साथ पाँव भर टमाटर लाना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
     

सोमवार, 19 अगस्त 2013

rakhi ka tyohar

राखी का त्यौहार,बहन भाई का प्यार,
चार धागों में सिमटा,प्रेम प्यार एतबार।
राखी का त्यौहार। …………………. 
राखी का त्यौहार इसलिए तो खास बहुत,
बहन को भाई पे ही होता है विश्वास बहुत,
राखी ही तो प्रेम प्यार में करती है विस्तार।
राखी का त्यौहार। …………….
राखी ही मन के सागर में उठाती उमंग है,
बहन के मन में भाई के लिए उठती तरंग है,
राखी के दिन बहन को भाई का इन्तजार।
राखी का त्यौहार। …………….
चार धागों का अटूट ये बन्धन टूटता नही,
पवित्र ये रिश्ता हाथ कभी  भी छूटता नही,
देखना बन जाये न पवित्र त्योहार व्यापार।
  राखी का त्यौहार। ……………. राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
सुप्रभात, राखी की शुभ कामनाओ सहित जय जय मां 
दोस्तों सोच समझ ध्यान से पढ़ना अपनी रचना को 

इस ओर उस पार चले,
तेरी ही सरकार चले।
तेरे दम से जहां रोशन,
रहमत तेरी संसार चले।  
मेरे बारे भी सोच करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है मेरी मां की,
जिससे ये घर बाहर चले।
अपने तन पे फटे कपड़े,
कोरे पहन हो तैयार चले 
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।
उपर से चलती राजनीति,
कब नीचे से भ्रष्टाचार चले। 
पाक समझे कमजोर हमको,
रोज सीमा पे हथियार चले।
तब बरबादी नही है रूकती,
जब वक्त की तलवार चले। 
तेरी बेवफाई का है सदका,
"रैना"हम जिन्दगी हार चले। राजेन्द्र रैना "गुमनाम" 

is apr chle

इस ओर उस पार चले,
तेरी ही तो सरकार चले।
मेरे बारे सोच तू करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है औरत की,
जिससे ये घर बाहर चले।
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।


रविवार, 18 अगस्त 2013

mahfil ae jjbat

महफ़िल ए जज्बात में आ के तो देख,
सूरत बदल जाये दिल लगा के तो देख।
चिराग बुझाना तो बहुत आसां है यारा,
तू गरीब के घर चिराग जला के तो देख।
ख्वाबों में महल बनाना मुश्किल नही है,
जमीन पे तू इक कमरा बना के तो देख।
दूसरों के घरों पे अक्सर उठाता है उंगली,
अपने घर के अंदर कभी जा के तो देख।
तीर्थ नहाने से न मिलती मन की शांति,
मां बाप के चरणों में सिर झुक के तो देख।  
गुलशन में गुल खिलते हैं तमाम लेकिन,
"रैना"मन का गुलाब तू खिला के तो देख।राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ इक रचना। … जय जय मां     

शनिवार, 17 अगस्त 2013

aalla waheguru

अल्ला वाहेगुरु ईशा राम राम लिखना,
काश मुझे आ जाये तेरा नाम लिखना।
सीख लिया मैने सब कुछ कुछ न बाकी,
पर आया न अदब दुआ सलाम लिखना।
लिखना ही तो गिजा खुराक है उनकी,
कलम के दीवानों ने तो तमाम लिखना।
बेचारे कुछ ऐसे भी है लिखने वाले यारो,
नेताओं से कहते मेरे नाम इनाम लिखना।
गर मौका मिल जाये उसके बारे लिखने का,
रैना को भटका मुसाफिर गुमनाम लिखना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात जी। ……… जय जय मां   

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

दोस्तों आप की अपनी रचना 

अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं। 
जो दिखाये गा मंजिल का रास्ता,
मैं वो पैगम्बर तलाशता रहता हूं। 
ईमानदारी की वजह मोहताज हूं,
अब अपना चैम्बर तलाशता रहता हूं।
जिधर देखता लगी हैं लम्बी कतारें,
मैं अपना नम्बर तलाशता रहता हूं। 
"रैना"मुफ़्लिस का तुम हाल मत पूछो,
सिर छुपाने को अम्बर तलाशता रहता हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम   
                                            094160 76914 

main usse dur nhi

वो मुझसे दूर नही है मैं भी उसके करीब हूं,
मगर उसे देख नही सकता बड़ा बदनसीब हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां

अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं,
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
बेशक वो भी इक इन्सान ही था,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
परियों का नाच देखने की हसरत,
खूद में इन्दर तलाशता रहता हूं। 

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

kaise aajadi kiski

15 अगस्त पर विशेष

कैसी आजादी किसकी आजादी कब हुई आजादी,
लोग जश्न मना कर क्यों कर रहे वक्त की बरबादी।
कैसी आजादी किसकी  ……………………. 
गरीब भूखा मर रहा अनाज गोदामों में सड़ रहा है,
कर्जे के बोझ तले दबा किसान आत्महत्या कर रहा है,
आदेश के अभाव में जवान सीमा पर खड़ा डर रहा है,
ये विडम्बना पैदा होते बच्चे के सिर कर्ज चढ़ रहा है,
65 वर्षों बाद भी दहशत में है देश की आधी आबादी।
कैसी आजादी किसकी...................................
जरा गोर से देखो तो सारा सिस्टम ही फेल लगता है,
अब उपर से नीचे तक सिर्फ पैसे का ही खेल लगता है,
इमानदार वफादार के लिये हिंदुस्तान जेल लगता है,
दुष्ट आत्माओं का इस जमीं पर हो रहा मेल लगता है,
अब मसीहा बन रहे चुगल चम्मचें चोर उच्चके शराबी।
कैसी आजादी किसकी ………………………….
सही मायनों में आजाद हुआ विशाल अजगर भ्रष्टाचार,
आजाद हुए रिशवतखोर बेईमान देशद्रोही कपटी गद्दार,
खुली हवा वो साँस ले रहे जिनका नफरत का कारोबार,
देश के जो कट्टर दुश्मन उनके गलों डलते फूलों के हार,
हर बड़े ताले को अब तो खोल रही है भ्रष्टाचार की चाबी।
कैसी आजादी किसकी ………………………….
भारत माता रो रो कर अब अपना दुखड़ा यूं सुनाती है,
मुझको तो आजादी कहीं पर भी अब नजर न आती है
बेरोजगार मायूस बच्चे को देख कर मां आंसू बहाती है,
दूर दूर तक आशा की कोई किरण झलक न दिखाती है,
जनता अब अस्वाशानों के दम से देखती ख्वाब गुलाबी।
कैसी आजादी किसकी ....................राजेन्द्र रैना "गुमनाम "

बुधवार, 14 अगस्त 2013

सभी मित्रों को स्वतन्त्रता दिवस की शुभ कामनाएं

मगर आज लाल किले पर प्रधानमन्त्री
द्वारा दिए भाषण से लगता है ?????
भारत की गाड़ी तो दलदल में धसे गी,
जब प्रधानमन्त्री ही रो रहा है,
फिर जनता कैसे हंसे गी। राजेन्द्र रैना गुमनाम "
सुप्रभात जी। ……………जय जय मां 

jshne aajadi

स्वतन्त्रता दिवस की ख़ुशी मना रहे लोग,
नेता जी हिसाब लगा रहे कितना कमाये गे। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

 दोस्तों नारी जाति को ध्यान में रख कर,
एक कविता लिखी गई है,यदि महिला मित्र चाहे गी
 मैं तभी इसे पोस्ट करु गा।
इस कविता का मुखड़ा लिख रहा हूं. कोमेट्स जरुर करे

       कविता      नारी 
अब उठ री नारी बावली मत न तू श्रृंगार कर,
वक्त है विपरीत खुद को युद्ध के लिए तैयार कर।राजेन्द्र रैना गुमनाम"

neta hota hai

दोस्तों देखिये मेरी  लेखनी का अंदाज

जवान होता सीमा पे मरने के लिये,
नेता होता अपना घर भरने के लिये।
पाकिस्तान है हमला करने के लिये,
भारत के प्रधानमंत्री हैं डरने के लिये।
वाड्रा को लेकर बेवजह मजा है शोर,
दामाद तो होता माल रगड़ने के लिये।
नेता देखिये किस कद्र बदलते हैं रंग,
नीतिश बेताब हाथ पकड़ने के लिये।
लालू की अर्जी तभी ख़ारिज हो गई,
इनाम मिले पशु चारा चरने के लिये।
मुन्नी बाई शीला खूब मशहूर हो गई,
फिल्मों में बचा न कुछ करने के लिये।
बाबा के उपदेश पे जनता करे अमल,
बाबा होते सिर्फ कथा पढ़ने के लिये।
राजनीति में चम्मचागिरी आम बात,
नेता का माथा होता है रगड़ने के लिये।
पढ़ लिख कर डिग्री लिए घूमता गरीब,
पैसे बिना चारा न आगे बढ़ने के लिये।
"गुमनाम"से खफा है तू किसलिए बता,
तू और कितने गम देगा जरने के लिये। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"




रविवार, 11 अगस्त 2013

dil betab hai kisi ko apna

ख्वाबों का हसीन शहर वो सजाने के लिये,
दिल बेताब किसी को अपना बनाने के लिये।
मैंने सुन रखा ये क्या इसमें कुछ सच्चाई है, 
इश्क में दिल होता है सिर्फ जलाने के लिये।
आजकल कल राजे दिल कोई खोलता नही,
ये हंसते दांत होते है फ़कत दिखाने के लिये।
टांगें खींचना टांगें अड़ाना जमाने की फितरत,
हाथ थामता नही अब कोई भी उठाने के लिये।
गुमनाम"समझ ली है हमने कहानी ये,सारी,
सच में अब कुछ भी बचा नही बताने के लिये। राजेन्द्र रैना गुमनाम"













शनिवार, 10 अगस्त 2013

महफ़िल ए जज्बात में हम भी चले आये,
सुना यहां कोई किसी के जज्बातों से खेलता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

insan

"रैना"इन्सान इतना तो सम्भल जाये,
जीते जी दिल की अर्थी न निकल जाये।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 किसी से दिल मिलाने की देर है,
"रैना"लोग पत्थर मारने लगे गे। राजेन्द्र रैना गुमनाम"


उसको कबूल मेरी फ़रियाद हो,
तेरे ख्वाबों का शहर आबाद हो,
हम तो मांगते है ये दुआ दोस्त,
तुम्हे जन्म दिन मुबारखबाद हो। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

siyastdan

क्या बूढ़ा भी जवान हो सकता है।
क्या खुशहाल हर इन्सां हो सकता है,
तीर मारा है इशारा करके,
हाथ छोड़ा है नकारा करके।
हाल से बेहाल हम है "रैना"
दूर बैठा वो किनारा करके। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

ik ghar id

इक घर ईद,
दुसरे घर तीज,
ये नजारा ????
तो सिर्फ भारत में ???
देखने को मिलता है। गुमनाम"

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

roti bhart mata ko

रोती भारत माता को अब चुप कराने वाला कोई नही,
जख्म देने वाले बहुत महरम लगाने वाला कोई नही।
खद्दरदारी मसीहा अब ठेकेदार बन गये भ्रष्टाचार के,
समस्त ही मां को लुटने वाले बचाने वाला कोई नही।
अपनी अपनी  सब को पड़ी न देश की कोई सोच रहा,
देखो गरीबों को हटा रहे गरीबी हटाने वाला कोई नही।
पढ़ लिख कर भी बेरोजगार युवा आत्महत्या कर रहे,
क्योकि बिन पैसे उनको नौकरी दिलाने वाला कोई नही।
बेमौत अब सैनिक मरते उनके परिवार जन बिलख रहे,
बैरी का मुंह तोड़े ऐसी हिम्मत दिखाने वाला कोई नही।
अंग्रेजों के चम्मचें सिर्फ चम्मचागिरी ही पसन्द करते हैं,
भगवान के सिवा अब भारत को बचाने वाला कोई नही। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

hal mere dil

दोस्तों आज की ग़ज़ल आप के नाम

दर्द मेरे दिल का जानते नही,
दिन बुरे आये पहचानते नही।
ये मसीहा क्यों समझते नही,
भूत लातों के यूं मानते नही।
यार ने मयकश तो बना दिया,
मेरे बारे क्यों अब सोचते नही। 
दिल लगाना एक से अदा मेरी,
ख़ाक दर दर की हम छानते नही
झूठ से नफ़रत सच के करीब हैं, 

सूत से शामियाने तानते नही।
हद असूलों में है जिन्दगी बंधी,
रैन" सीमा को हम लांघते नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

 
अपने लिखने का अन्दाज कुछ ऐसा है,
दिल की बात कहते है कलम के मार्फत। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

कुत्तों के भौकने की परवाह नही करते,
गुजर जाते जिस गली से गुजरना होता। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

बाज आ जा पाकिस्तान????? 
अपनी हरकत से?????
वरना तुझे बुरी तरह तोड़े गे?????
बंगला देश की तरह??????
अलग बलोचिस्तान बना के छोड़े गे। राजेन्द्र रैना गुमनाम"

बुधवार, 7 अगस्त 2013

pakistani

दोस्तों के लिए मौजूदा दौर ध्यान में रख
खास अंदाज

अपना स्वाभिमान भी खोना पड़ता है,
 मसीहा बुझदिल हो तो रोना पड़ता है।
 राजा भूल जाये जब फर्ज धर्म अपना,
 फिर जनता को खाली पेट सोना पड़ता है।
 सावन के महीने में तो रोते होगे सभी,
 हमें आषाढ़ में दिल भिगोना पड़ता है।
 चम्मचागिरी से राज काज नही चलता,
 जनता का बोझ पीठ पे ढोना पड़ता है।
 सोनिया से शान से कह रहे मनमोहन,
चीन का बड़ा ही सस्ता खिलौना पड़ता है।
 देश का बच्चा बच्चा अब कहने लगा है,
 खून का दाग खून से ही धोना पड़ता है।
 गुमनाम" तू जान ले सत्य है ये कथन,
बेशर्म के साथ तो बेशर्म ही होना पड़ता है। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
   

मंगलवार, 6 अगस्त 2013

पत्रकार ने कांग्रेस के महान नेता दिग्गविजय से पूछा
पत्रकार-नेता जी भारतीय चौकी पर पाकिस्तानी सेना के
 हमले बारे आप का क्या ख्याल है।
दिग्गविजय-मेरे ख्याल में ये हमला सौ प्रतिशत फर्जी है।
पाकिस्तान को बेवजह बली का बकरा बनाया जा रहा है।
इस पर कांग्रेस प्रवक्ता अल्वी जी का जवाब
दिग्ग विजय जी का ये अपना मत है, हमारे हिसाब से मामले
की जाँच करवाई जाये।
वैसे प्रधानमन्त्री साफ कर चुके है नवाज शरीफ को खाने पर बुला कर
इस बारे पूछे गे.……… राजेन्द्र रैना गुमनाम"
दोस्तों ?????
बहादूर आईए एस दुर्गा शक्ति नागपाल के सम्मान में
 कुछ लिखना लिख रहा हूं आप का समर्थन चाहिए।

ओ दुर्गा तुझे सलाम,ओ दुर्गा तुझे सलाम,
मुलायम,अखिलेष की तूने कर दी नींद हराम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
वफा ईमानदारी की तू मिसाल है,
तेरा अन्दाज तो निडर बाकमाल है,
मर्द घबराये नारी ने कर दिया वो काम।
 ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
खनन माफियों के छक्के छुड़ा दिये,
बड़े बड़े रसूकदार थाने में बैठा दिये,
अपने फर्ज को बखूबी दिया तूने अंजाम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
देश में बेईमानों के चाहे लम्बे हाथ हैं,
इमानदार भारतीय सारे ही तेरे साथ हैं,
गद्दारों को ऐसे ही तू कर देना तमाम।
ओ दुर्गा तुझे सलाम,…………
मां आदि शक्ति बलशाली का तू अंश है,
भ्रष्टाचारियों का तूने करना विध्वंश है,
"रैना"मन से तेरे चरणों में करता है प्रणाम।
 ओ दुर्गा तुझे सलाम,………… राजेन्द्र रैना गुमनाम"


bhart mata baithhi

दुखी मन से लिखी रचना

भारत माता अपने हाल पे सुबक सुबक के रोती है,
सोचती बेशर्मी और बुझदिली की कोई हद होती है।
चीन सीमा में घुसता,पाकिस्तान बेख़ौफ़ दहाड़ता है,
वो सरेआम जवानों को तड़फा तड़फा कर मारता है।
कभी कभी पाकिस्तान ऐसा भी साहस दिखलाता है,
जवानों की गर्दन ही उतार कर अपने साथ ले जाता है।
मगर हमारे नेता चिकने घड़ों को कोई फर्क नही पड़ता,
क्योकि बार्डर पर इनका कोई अपना जो नही है मरता।
गिरगट घटना के बाद मेंढक बन टर टर करने लगते हैं,
शहीदों के घर झूठे आश्वासनों से जम कर भरने लगते हैं।
काश कोई सुभाष चन्द्र बोस जैसा स्वाभिमानी नेता आये,
जो धोखेबाज पाकिस्तानियों की होश को ठिकाने लगाये।
क्योकि मनमोहन सिंह जी तो अपना फर्ज ऐसे निभाते है,
पड़ोसी देशों की धमकी सुन सोनिया की गोद में छुप जाते है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"  

सोमवार, 5 अगस्त 2013

wah kya khub

दोस्तों इसे भी देखे प्यार से

वाह क्या खूब अन्दाज उनके,
नाक पे मख्खी नही बैठने देते।
हो गये है खफा हम से इस कद्र,
अब हमारा नाम भी तो नही लेते।
गुस्ताखी हो गई इक बार हमसे,
मेरे कुचे में ही आना छोड़ दिया,
तरस आया नही मेरे इस हाल पे,
गुंचे के मान्निद दिल तोड़ दिया।
ऐ खुदा हम तुझसे ये अर्ज करते है,
तू ही उन्हें बता हम उन पे मरते है। राजेन्द्र रैना"गुमनाम"  

रविवार, 4 अगस्त 2013

sath rhta magr bolta nhi

साथ रहता पर बोलता नही,
राज दिल के क्यों खोलता नही।
चेहरे से चिलमन हटा कभी,
आंख भर के क्यों देखता नही।
यूं कहे तुझसे मैं जुदा नही,
पास मेरे तू बैठता नही।
बात "रैना" की मान ले कभी,
बिन तिरे जीवन महकता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी.…………जय जय मां ।


dosti to hai

दोस्तों देखना ये रचना कहां तक सही है

दोस्ती तो है मगर किताबों में,
तंगी में दोस्त मिलते ख्वाबों में।
इस जमाने ने अब तौर बदला,
दोस्ती घुल मिल गई शराबों में।
कृष्ण से पूछता सुदामा क्यों अब,
दोस्ती का फूल न खिले बागों में।
जो दोस्ती की चमक बराबर रखे,
उल्फत का तेल न इन चिरागों में।
रैना"मत कर अब दोस्ती की बातें,
खो जा फिर से उन पुरानी यादों में। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

    

dosti ki bqate

दोस्ती दिवस पर खास पेशकश

मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 
 

शनिवार, 3 अगस्त 2013

ye bta mai tujhe

रविवार विशेष ग़ज़ल दोस्तों के लिए

ये बता मैं तुझे यूं भुलाऊ कैसे,
जिन्दगी को नरक अब बनाऊ कैसे।
चश्म में अक्स तेरा बसे तू दिल में
याद तेरी यहां से हटाऊ कैसे।
बिन तिरे हर तरफ है दरद तन्हाई,
बेदर्द मौत खुद को बचाऊ कैसे।
दोस्तों से गिला हम करे भी तो क्या,
हाल दिल का किसी को सुनाऊ कैसे।
अब मसीहा नही है भरोसे काबिल,
आइना भेडियों को दिखाऊ कैसे
सोचता रैन" दिन हर घड़ी हरपल मैं,
दाग दिल पे लगे अब मिटाऊ कैसे। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"  

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

aakhir kya teri

दोस्तों यार को समर्पित ये ग़ज़ल

आखिर क्या वो मजबूरी है,
हमसे क्यों इतनी दूरी है।
हम मुफ़्लिस दीवाने तेरे,
तू दानी की मशहूरी है।
क्या बरपा तेरी बस्ती में,
हर मुखड़ा अब बेनूरी है।   
खाने दे मुझको जी भर के,
मां के हाथों की चूरी है।
रैना"सोचे दिन कब निकले,
जिंदगी हो जाती पूरी है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी  …  जय जय मां  

bismal

दोस्तों के नाम छोटी बहर की ग़ज़ल

बिस्मिल मिरा ये दिल,
जीना हुआ मुश्किल।
वो जान का दुश्मन,
है गाल पे जो तिल।
यूं देख कर हालत,
खिल खिल हंसे कातिल।
वो दरद आहें आंसू,
है इश्क में हासिल।
मझदार में भटके,
है दूर वो साहिल।
गर चाह कुरसी की,
"गुमनाम" हो जाहिल। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"

बुधवार, 31 जुलाई 2013

chhodo gali gloch

दोस्तों स्टाफ सैलेक्शन कमिशन हरियाणा के सदस्य
 ए के जैन अम्बाला
 द्वारा शुरू किये गये गाली छोडो अभियान का हिस्सा बने
इस अभियान को समर्पित ये गीत


छोड़ो गाली गलोच,
बदलो अपनी सोच,
पढ़ लिख कर गुणवान हुये,
कहने को हम बुद्दिमान हुये,
कड़वा है सच बेशक ये ही बात आम है,
गाली हमारा अब तो तकिया कलाम है।
गाली हमारा ………………
करते गर्व हम सब अपनी झूठी शान पर,
मां बहन की गाली रहती हमारी जुबान पर,
माहौल बन गया ऐसा न किसी पे इल्जाम है।
गाली हमारा ,.....................
"रैना" का कहना अब तो गाली देना छोड़िये,
प्यार से बोल के कानों में मिश्री सी घोलिये,
लड़ाई झगड़े नफरत गाली का ही परिणाम है।राजेन्द्र "रैना"   

रविवार, 28 जुलाई 2013

jine ki tmnna

जीने की तमन्ना नही मरने की सोचने लगे हैं,
अफ़सोस है यही ये कुत्ते फिर से भोकने लगे हैं।
क्या करे गा जा कर वहां आराम बिलकुल नही,
कुछ तो ये कह कर भी रास्ता मेरा रोकने लगे हैं।
जब से उन्होंने सुनी मेरी तैयारी की खबर यारो,
अब वो मेरे बारे में कुछ अच्छा ही सोचने लगे हैं।
जिन्दगी जीने में अब तो लुत्फ़ सा आने लगा है,
जब से मुझे वो अपना समझ कर टोकने लगे हैं।
गुमनाम" जब से उसने शुरू कर दी  तारीफ मेरी,
तब से तो हम भी जम के आईना देखने लगे हैं। राजेन्द्र 'गुमनाम" 
     

शनिवार, 27 जुलाई 2013

wah mere desh ke neta

एक व्यंग्य कविता,

वाह मेरे देश के नेता,
अपने कुत्ते पर हर रोज??????
500 रूपये खर्च कर जाते है,
और गरीब जनता को?????
पांच रूपये में खाना खिलाते हैं।
नेता हाव भाव ऐसे दिखाते हैं,
जैसे वो नर्क लोक में होटल चलाते हैं,
क्योकि धरती लोक में ऐसा कुछ????
नजर नही आता जहां गरीब का मन खिलता हो,
और पेट भर खाना एक,पांच,12 रूपये में मिलता हो।
अब लगता हैं ये नेता कुछ नया करके दिखाये गे,
गरीबी मिटाने के लिये गरीबों को जड़ से मिटाये गे। राजेन्द्र "गुमनाम"

सोमवार, 22 जुलाई 2013

दोस्तों ये ग़ज़ल आप के नाम

दोस्ती तुझ से रखना चाहते है,
तुम हसीं हो हम हंसना चाहते है।
हादसें इस नगरी में हो रहे हैं,
हादसों से हम बचना चाहते है।
इश्क का जयिका तो अच्छा नही है,
स्वाद फिर भी ये चखना चाहते है।
घर बने कैसे महंगाई बहुत है,
तेरे दिल में हम बसना चाहते है।

हो लिखा जिसमे जीने का तरीका,
हम किताबे वो पढ़ना चाहते है।राजेन्द्र "गुमनाम"


शनिवार, 20 जुलाई 2013

anna tu bhi chup gya ganna

गुस्ताखी माफ़ कोई दिल को मत लगाना
सिर्फ हंसने के लिए व्यंग्य

अन्ना तू भी ???
चूस गया गन्ना,
बिना दंत के,
लगता है सी बी आई से ????
डर रहा है,
तभी तो बयान?????
बदली कर रहा है,
खैर???
भारत में जो भी नेता बन जाता है,
गिरगट की तरह रंग बदल जाता है।राजेन्द्र "गुमनाम"

शुक्रवार, 19 जुलाई 2013

jindgi me ab najara

मेरी किताब की इक रचना
 दोस्तों की महफ़िल में

जिंदगी में अब नजारा न रहा,
जो हमारा था हमारा न रहा।
हाथ पकड़े गा न कोई ये चिंता,
वो सहारा अब सहारा न रहा।
बन्दगी करने की हसरत थी मिरी,
देवता मेरा पियारा न रहा।
तरस खाये तो भला क्यों ये बता,
आदमी अब तो बेचारा न रहा।
झूठ सिर चढ़ बोलता है अब यहां,
सच उगलता अब वो नारा न रहा।
सिरफ़"रैना को हैअफ़सोस यही,
ख्वाब में अब वो सितारा न रहा।राजेन्द्र "रैना"

मेरे युवक दोस्तों के लिए

जो हिम्मत से दोस्ती होगी,
फिर तो हर तरफ रौशनी होगी।
तू  उठ कर चलता क्यों नही,
मंजिल तेरा रास्ता देखती होगी।"राजेन्द्र "गुमनाम"

रविवार, 14 जुलाई 2013

marna marna kyo ab karna

संडे स्पेशल दोस्तों के लिए खास

मरना मरना क्यों अब करना,
जीने की बस बात करे,
जहां भी जाये जिस महफ़िल में,
खुशियों की बरसात करे।
 जहां भी जाये ............................
चार दिन की है जिंदगानी,
न जाने कब खत्म कहानी,
 आँखों में मत लाना पानी,
अफ़सोस क्यों जब चीज बेगानी,
टूटे बिखरे धागें जोड़े,
हंस हंस के मुलाकात करे।
जहां भी जाये ..........................
मिठ्ठे मिठ्ठे बोल हम बोले,
यूं कानों में मिश्री सी घोले,
मन के बाद दरवाजे  खोले,
अपने तराजू में सच तोले,
गुमनाम"मशहूर जो जाये,
जो नेक अपने ख्यालात करे।
जहां भी जाये .......................राजेन्द्र "गुमनाम"







शनिवार, 13 जुलाई 2013

char kandhon pe

दोस्तों सच्चाई पर आधरित ये गीत

चार कन्धों पे हो के सवार,चले गे जब यार,
कुछ तो रोये गे,
जिनसे रहती मेरी तकरार,जो खाते मुझसे खार,
वो तो खुश होये गे।
हां कुछ तो रोये .............
कुछ तो कहे गे बड़ा ही सयाना था,
और कुछ कहे गे अंधों में काना था,
कुछ कहे गे होनहार खिलाड़ी था,
और कुछ कहेगे कोड़ की बीमारी था,
कुछ कहे भगवन गिन गिन बदले लेना,
कुछ कहे गे इस की रूह को शांति देना,
कोई कुछ भी कहे,
हम तो चैन से सोये गे,
हां कुछ तो ....................................
बच्चें कहे गे बाप ने कुछ न छोड़ा है,
बीवी कहे गी इसने खून ही निचौड़ा है,
पडौसी कहे गे पैसे मेरे भी खा  गया,
दोस्त कहे गे चूना हमें भी लगा गया,
इस दुनिया का गुमनाम " ये दस्तूर है,
उसको भूल जाते जो चला जाता दूर है,
जिस से है मतलब,
कपड़े उसके ही धोये गे।
हां कुछ तो .......................राजेन्द्र "गुमनाम"

शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

mainekhud ko krib se

मैने खुद को करीब से नही देखा,
जमाना देखने की बात करता हूं,
जो मेरा अपना उससे प्यार नही,
सिर्फ दिखावा करु उससे डरता हूं।
आवाजें आती रहती हैं पत्थरों से,
मैं सुन कर भी अनसुनी कर देता,
बेवजह के कामों में उलझा हरदम,
सजायाफ्ता मैं जुर्माना भरता हूं।
मोह माया की बीमारी लगी मुझको,
खबर है फिर भी इलाज नही करता,
"रैना" को इंतजार उस सुबह का है,
इसलिये तो बेहिसाब गम जरता हूं।राजेन्द्र "रैना"
सुप्रभात जी ................जय जय

tute pttoki

दोस्तों के लिए खास

टूटे पत्तों के मान्निद बिखर जायेगे,
ये तो खुदा जाने फिर किधर जायेगे।
इतने हसीन जलवें हरगिज न होगे,
होगा गुप अन्धेरा हम जिधर जायेगे।
सोचने से बेहतर कर्म ही किया जाये,
फिर तो निश्चत है उसके घर जाये गे।
सच की राह पे"रैना"जो भी चलते हैं,
बेशक उन के तो जन्म संवर जाये गे।राजेन्द्र "रैना"

गुरुवार, 11 जुलाई 2013

pas rhake bhi dur

इस जिन्दगी की है यही दास्ता,
मेरा तुझसे तेरा मुझसे वास्ता।
मैं परेशान तुझ को ही ढूंढ़ रहा,
तेरे घर आने को कोन सा रास्ता।राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी ................जय जय मां 

wah ri sarkar

वाह री सरकार?????
गरीबों को सस्ता अनाज दिया है,
मध्यवर्गीय के
भूखे मरने का इंतजाम किया है।राजेन्द्र "गुमनाम"

मंगलवार, 9 जुलाई 2013

maa ki yaad

मां की याद तो जरुर आये गी,
क्योकि उसी का खून तो रगों में दौड़ता है।राजेन्द्र गुमनाम"

सोमवार, 8 जुलाई 2013

prda nshi

पर्दानशी ओ पर्दानशी,
हटा पर्दा दिखा जलवा,


गुलामों के शहर में सिर्फ चंमचों की कद्र होती है,
अब आम जिन्दगी तो बस चौराहे पे खड़ी रोती है,
देखो मंहगाई ने अब तो जीना हराम कर दिया है,
शराबी की बीवी चार बच्चों की मां भूखी सोती है।"राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी .......................जय जय मां 

रविवार, 7 जुलाई 2013

kar le sajn se bat

सूफी गीत

कर ले सजन से बात,
वर्ना हो जाये जब रात,
बहुत पछताये गी,
कोई सुन गा तेरी पुकार,
रोये गी चिल्लाये गी।
रोये गी ...................
दिन को देख तू काये इतराये,
पल पल दिन ये ढलता जाये,
मिट्टी का साथ मिटटी के संग है,
इक दिन मिट्टी मिट्टी में मिल जाये,
जब जीती बाजी जाये हार,
रूह भी घबराये गी।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...................जय जय मां

शनिवार, 6 जुलाई 2013

brhte kadmom

सन्डे स्पैशल आप के लिए

बढ़ते कदमों को रोकना जरुरी है,
किसलिये आये सोचना जरुरी है।
ख्वाहिशों की उड़ान कम कर ले,
देखो खुद को भी टोकना जरुरी है।
आजकल के बच्चें कब सुनते हैं,
फिर क्या बेवजह भौंकना जरुरी है।
दोस्त भी बेवफा निकल जाते हैं,
दोस्ती से पहले परखना जरुरी है।
तेरे सीने में तो धड़के उसका दिल,
उसके सीने में तू धड़कना जरुरी है।
गुमनाम"की गुजारिश पे गौर कर,
चिलमन हटा तुझे देखना जरुरी है।राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी ............जय जय मां 

गुरुवार, 4 जुलाई 2013

dil me drd

 दिल में दर्द होने लगा,
सावन अभी आया नही।
नैना मिरे छम छम बरसे
बादल अभी छाया नही। राजेन्द्र "गुमनाम"

dopahar krari dhup me

दोपहर करारी धूप में शाम का जिकर,
करते हैं वो लोग जिन्हें रात की फ़िकर।
क्यों करता मेरी मेरी तेरा कुछ भी नही,
उसका ही सब कुछ है तू देख ले जिधर।
अपने दिल को लगा ले तू उसके रास्ते,
वर्ना जिन्दगी की बड़ी मुश्किल है डगर।
हाथ जोड़ सब से कर राम दुआ सलाम,
करता जो किसी की उसकी होती कदर।
वो देख रहा है ऐब तेरे गुनाह तमाम जो,
हरपल हर घड़ी उसकी तुझ पे है नज़र।
 गुमनाम"तू भी जी ऐसे औरों के वास्ते,
सीना ताने खड़ा सेवा में जैसे बूढ़ा शजर।राजेन्द्र "गुमनाम"
शजर =पेड़
सुप्रभात जी ................जय जय मां  

usko bhi mere

   उसको भी मेरे फटे हाल पे तरस नही आता,
   मैंने हजारों घिसा दी कलमें लिखते लिखते।"राजेन्द्र गुमनाम।

teri sirdi

साईं बाबा की शान में लिखे भजन की चंद लाइन

ओ तेरी सिरडी का भक्तों सिरडी का अजब नजारा है,
लगता साईं ने जन्नत को धरती पे खुद ही उतारा है।
तेरी सिरडी का ...................................
सारी दुनिया के वासी साईं बाबा के दर्श को आते हैं,
देव देवा भी इस दर पे आ कर के शीश झुकाते है,
मेरे बाबा का अन्दाज देखो सबसे अलग न्यारा है।
तेरी सिरडी का ....................................राजेन्द्र गुमनाम"

बुधवार, 3 जुलाई 2013

teri aankhon me

दोस्तों प्यारी सी रचना आप के हवाले

तेरी आँखों में डूब के मर जाये तो अच्छा,
ये जिंदगानी नाम तेरे कर जाये तो अच्छा।
दिल के जख्मों में दर्द होता रहता है रात भर,
मौत की मरहम से जख्म भर जाये तो अच्छा।
आतिशे इश्क ने जला दिये आशिक तमाम,
बेमौत मरने वाले गर यूं डर जाये तो अच्छा।
धर्म करने गये मगर फिर भी क़यामत आ गई,
भटके हुये वो मुसाफिर घर जाये तो अच्छा।
लाख चौरासी के चक्कर में फिर भटकेगा यही,
"गुमनाम" भव सागर से तर जाये तो अच्छा।राजेन्द्र "गुमनाम"
आतिशे इश्क =इश्क की आग 

मंगलवार, 2 जुलाई 2013

uthha lo bsta

उठा लो बस्ता चलते उस स्कूल में,
देश भक्ति की पढ़ाई होती है जहां,
विदेशों में तो ऐसे स्कूल तमाम हैं,
भारत में बताओ ऐसा स्कूल है कहां।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी .............जय जय मां 

sikhi hai tune kaha se

दोस्तों आप का मन बहलाने के एक गीत आप के नाम

ये बता सीखी कहां से यूं दिल चुराने की अदा,
तीरे नजर से वार कर बिजली गिराने की अदा।
ये बता सीखी .......................................
झुकी झुकी नजरें तेरी महका महका शबाब है,
हुस्न के जलवे हसीन देख दिल हुआ बेताब है,
 जान की दुश्मन बनी तेरी मुस्कराने की अदा।
ये बता सीखी .......................................
फैशन के इस दौर में है लाजवाब तेरी सादगी,
तू तो अनजान मगर गुमनाम करे तेरी बंदगी,
इक बार तू दिखा मुझको गले लगाने की अदा।
ये बता सीखी ...................................राजेन्द्र "गुमनाम"

ab mai aur kya kah skta hu

अब मैं और क्या कह सकता हूं,
कुत्ते भोंकने लगे स्टेज पे चढ़ कर।राजेन्द्र "गुमनाम"

log smjht

लोग समझते नही मिजाज मेरा,
वैसे मैं हर इन्सान में भगवान देखता हूं।राजेन्द्र "गुमनाम"

he yuwa

दोस्तों मेरी आप सब से हाथ जोड़ कर
विनती है ये कविता जरुर पढ़े

हे युवा हो खड़ा,
वक्त है नाजुक बड़ा,
नीम पर करेला चढ़ा,
हो गया कड़वा बड़ा।
तू बता किस से डरा,
घर तू सोया पड़ा,
मां तुझे पुकारती,
रस्ता तेरा निहारती।
हो गये हमले बड़े,
दुश्मन तलवार लिए खड़े।
मसीहा बेईमान हैं,
खोले बैठे दुकान हैं,
देश की चिंता न फिकर हैं,
बस अपना ही जिकर हैं।
सिर्फ लाइनें हैं खींचते,
अपना पेट ही पीटते।
चम्मचागिरी अब आम हैं,
इसी में उलझे तमाम हैं।
नीयत में सबकी खोट है,
मतलब सबका नोट है।
बस काम इतना कर रहे,
विदेशी बैंक हैं भर रहे।
युवाओं इतना काम करो,
गद्दारों का इंतजाम करो।
वरना वो दिन फिर आये गा,
मेरा देश गुलाम हो जाये गा।
ये अर्ज करता गुमनाम है,
अब होने वाली शाम है। राजेन्द्र "गुमनाम"


tujhse mohbbt kar

दोस्तों की नजर इक ग़ज़ल

हम मोहब्बत कर ले कैसे,
टूटे दिल शीशे के जैसे।
दुःख पीड़ा गम आहे नाले,
उल्फत के रस्ते हैं ऐसे।
अब दुनिया तो मतलब की है,
उससे रिश्ता जिस पे पैसे।
अच्छे कर्मों का फल मिलता,
मिल जाते जैसे को तैसे।
गुमनामी से कुछ नही हासिल,
घर चल दिये जैसे थे वैसे "राजेन्द्र गुमनाम"



vaise bujhdilo ki jmat me

 वैसे बुझदिलों की बस्ती में?????
  दिलदारों की इज्जत होती है।गुमनाम"

सोमवार, 1 जुलाई 2013

kya khak aesi

 क्या खाक ऐसी अमीरी जब मन रूष्ट है,
 निसंदेह धनवान है वही जो  सन्तुष्ट है।
 नीयत है जिसकी साफ वो धरमात्मा,
 जिसकी नारी पे बुरी नजर वो तो दुष्ट है।
 नशे से बराबर दूरी रखता जो नौजवान,
 मस्कुलर बदन उसका रहता हृष्ट पुष्ट है।
 गुमनाम"अब तू नसीहतें देना छोड़ दे,
आज इन्सान तो पहले से काफी चुस्त है। राजेन्द्र "गुमनाम"

रविवार, 30 जून 2013

mee har dukh dard ko

मेरे हर दुःख दर्द को सहने वाला,
दूर रहता है पास मेरे रहने वाला।
मैं करू जो शिकायत कभी उसकी,
उसे कोई नही कुछ कहने वाला।
उसकी तारीफ करना है मुश्किल,
वो नभ धरती दरिया बहाने वाला।
उसका का नाम वो सदा ही रहे गा,
गुमनाम"का नाम नही रहने वाला। राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी .......................जय जय मां 

muskrata rhta

दोस्तों ये रचना कैसी लगी,

मुस्कराता रहता गम से मुलाकात नही करता,
मैं अपनी आँखों से कभी बरसात नही करता,
बातों को तोलने का हुनर मुझको आता यारों,
तभी महफ़िल में कभी हल्की बात नही करता।
गम सहना उजालों में रहना सीख लिया मैंने,
मैं अपने दिल के घर में कभी रात नही करता।
बस्ती के लोगों को तभी तो भरोसा है मुझ पे,
मैं कभी इधर उधर की पांच सात नही करता।
बुजुर्गों की सेवा नारी का सम्मान मेरी फितरत,
गुमनाम"की यही पूजा वो जात पात नही करता।राजेन्द्र "गुमनाम"

शनिवार, 29 जून 2013

अब का सावन सदा याद रहे,कुछ ऐसा कर लेते हैं,
अपनी मोहब्बत की यादों में,इक पेड़ लगा देते हैं।
कुछ ऐसा कर लेते .......................................
प्यार की इस निशानी को फिर बच्चे सा पाले गे,
हमको ये सम्भालेगा,जो अब हम इसे सम्भाले गे।
गुमनाम" तुम ये सच जानो पेड़ आज्ञाकारी बेटे हैं।
कुछ ऐसा कर लेते ........................राजेन्द्र "गुमनाम"


nichedekh kar

नीचे  देख कर चलता ही नही,
हालत अपनी देखता ही नही।
मन्जिल कहां किधर है जाना,
इस बारे कुछ सोचता ही नही।
दौलत के लिए कुछ भी कर दे,
बढ़ते कदमों को रोकता ही नही।
मां का भक्त दीवाना मन्दिरों का,
घर बैठी मां को पूछता ही नही।
नसीहत देता अक्सर औरों को,
खुद को तो कभी टोकता ही नही।
गुमनाम"कुत्ता अपने मालिक का,
मग्न मस्ती में भौकता ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...........जय जय मां


ae na kde aakhi

punjabi sad sang

ae na kde aakhi mod de nishaniya,
dard da saman aasa sam sam rkheya,
tere to vichhad ke har gam sah leya,
sadi ae himmt assi jahir nhio chakhiya.
jahir nhio chkhiya .............................
surj mayus vekh chann preshan ni,
teri is nadani te tare vi hairan ni,
hire tu aabad hoi ranjha gya pateya.
jahir nhi chakheya .......................rajinder "gumnam"

hukmrano

हुक्मरानों की बेशर्मी अब हद से गुजर गई,
इंकलाब जिंदाबाद के नारें गूंजे गे गली गली।राजेन्द्र 'गुमनाम'

नेता को है अब वोटों से प्रीति,
जीने मरने पर सिर्फ राजनीति।राजेन्द्र"गुमनाम"  

शुक्रवार, 28 जून 2013

mr rhe hai

हकीम डाक्टर भी बेबस नजर आते हैं,
निरंतर मर रहे लोग इश्क के बुखार से।राजेन्द्र गुमनाम"

tere khyalon me

दोस्तों पेश है इक सूफी ख्याल,

तेरे ख्यालों में खोये रहते,
अपने बारे में सोचते नही,
तेरी याद में दिल भरे आहें,
अब हम इसको रोकते नही।
रोकते नही ....................
तेरे हुस्न के चर्चे करते न थकते,
दिल को सकून चैन मिले,
चेहरे से चिलमन हटाता नही तू,
गुमनाम"को ये शिकवे गिले,
वफादार हम तेरे कुत्ते जैसे,
मालिक पे हम कभी भौंकते नही।
रोकते नही ...................राजेन्द्र "गुमनाम"



गुरुवार, 27 जून 2013

tpti dophri

तपती दोपहरी में गम सा कोई यार मिले
ये जरूरी नही प्यार के बदले प्यार मिले।
जलती है शमा कही तो जलते हैं परवानें,
जिसकी किस्मत में उसी को बहार मिले।
महिवाल की जिद्द गर मिलना सोहनी ने,
कर के हिम्मत दरिया के उस पार मिले।
तेज रफ्तार महंगाई ने अरमां कुचल डाले,
अधिकतर लोग सोचों में डूबे लाचार मिले।
देशभक्तों को पागल कहते ये जहान वाले,
गद्दारों चम्मचों को ही आदर सत्कार मिले।
गुमनाम"की इतनी सी गुजारिश है तुझसे,
गर मुझे कोई यार मिले तो दिलदार मिले।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ........................जय जय मां


is jmane

दोस्तों के नाम प्यारा सा तोहफा
स्वीकार करे।

बदले इस जमाने का ये अंदाज खास है,
रिश्ता ही उसी से पैसा जिसके पास है।
मां बाप बहन भाई चाचा ओ नाना नानी,
रिश्तों की गरिमा का न कोई एहसास है।
पैसे वाले की पागल बेटी डोली चढ़ गई,
गरीब की पढ़ी बेटी क्वांरी बैठी उदास है।
नसीहत किसी को देने की आदत हो गई,
अब जिन्दगी हमारी अवगुणों की दास है।
पर्दे से बाहर आके सनम दिखा दे जलवा,
तरसती इन आखों की न बुझती प्यास है।
गुमनाम"फ़िदा तुझ पे दिलो जां से यारा,
खुद पे नही भरोसा पर तुझ पे विश्वास है।राजेन्द्र "गुमनाम"

बुधवार, 26 जून 2013

मंजिल की प्यास इतनी बढ़ी,
पैरों के छालें देखना भूल गये।राजेन्द्र 'गुमनाम"

tishngi ae mnjil

तिशनगी ए मंजिल इतनी बढ़ी,
पैरों के छालें देखना भूल गये।राजेन्द्र 'गुमनाम"

royega bahut muskrane ke

दोस्तों मेरे दिल का ???
टुकड़ा आप को कैसा लगा

रोयेगा बहुत मुस्कराने के बाद,
आयेगी याद मेरी जाने के बाद।
यूं तो दर्द का अहसास नही होता,
तडफे इन्सां जहर खाने के बाद।
हंस के तोड़ दिया तूने रिश्ता,
पछताये गा खत जलाने के बाद।
बिछुड़े आशिक मर मर के जीते,
सावन का महीना आने के बाद।

दो बार मौत से मुलाकात हुई है,
तेरे आने के इक तेरे जाने के बाद।
गुमनाम"को कोई शिकवा नही,
वैसे तूने मारा है बचाने के बाद।राजिन्द्र "गुमनाम"

bad muddt bhyi dil

बाद मुद्दत भी दिल में दर्द होता है,
वैसे वक्त की मरहम ने जख्म भर दिये हैं।"राजेन्द्र गुमनाम"

ham bhi chle jaye ge

टूटा दिल लेकर जीये कैसे,
दर्द का घूंट हम पीये कैसे,
टूटा सामांन तो घर में रखा नही जाता,
जोड़े दिल को ऐसा फेविकोल नही आता।राजेन्द्र "गुमनाम"

मंगलवार, 25 जून 2013

ruthhe yaar ko

दोस्तों के लिये नजराना ए दिल

रुठे यार को मनाये कैसे,
अपनी मजबूरी बताये कैसे।
हमसे वो मीलों दूर बैठा,
उसको हाले दिल सुनाये कैसे।
चिंता में डूबी जवान लड़की,
वो अपना दामन बचाये कैसे।
महंगाई ने जुल्म कर डाला,
मां बच्चों को दूध पिलाये कैसे।
मेरी मोहब्बत पे यकीं हो तुझे,
दिल को चीर कर दिखाये कैसे।
पैदा होने से पहले अरमां मिटे,
गुमनाम"टूटे सपने सजाये कैसे। राजेन्द्र "गुमनाम"

punjabi sufi song
tu mere mai tere dil vich vass jana,
ae mukam odo hasil hona,
jdo ishk de nag ne dass jana.
vass jana ha vass jana,
dass jana haye dass jana................
ishke da ghar dur bda,
dil ho jada mjbur dba,
ae ta aashik hi jande ne,
mja aada hai srur bda,
fer dhrti vi jnnt lgdi ae,
niviya pa ke yar ne jdo hass jana.
vass jana ha vass jana,
dass jana haye dass jana.........."gumnam"

dosto ik swal ka jwab aap jrur de

दोस्तों देश में आजकल नेता लोग????
 धर्मनिरपेक्षता का रोना रो रहे हैं

कृपया सवाल का जवाब अवश्य दे।
दुसरे का धर्म बदलवाने वाले को
क्या धर्मनिरपेक्ष कहा जा सकता है।राजेन्द्र "गुमनाम"

सोमवार, 24 जून 2013

sato vichhde

punjabi kalam

vichhdeya soneya yara kde ta sanu yad kri,
assi magde sajn khair teri tu vi ta friyad kri.
sanu yad kri, sanu yad kri ...............................
tur gyo ve sate rang gurha charh ke,
dil de vichkar ve fat dunga mar ke,
jive tu sanu hai luteya ove hi aabad kri.
sanu yad kri sanu yad......................rajinder "gumnam"

tujh se sikayat bas itni hai,
 kyo chhod gye ho yado ka kafila rajinder "gumnam"
तुझसे शिकायत बस इतनी है,
 क्यों छोड़ गये हो यादों का काफिला।राजेन्द्र "गुमनाम"


chunav ke badl

ये व्यंग्य रचना हम सब के लिए दोस्तों

चुनाव के बादल छाने लगे हैं,
सफेद कौवें गांव आने लगे हैं।
झूठे अश्वासनों की बरसात कर,
जनता को फिर बहकाने लगे हैं।
अपनी काली करतूतें छुपाने को,
दूसरो पे इल्जाम लगाने लगे हैं।
नेताओं के गुण्डों ने कसे लंगौटे,
गांवों में अब दारु पहुंचाने लगे हैं।
धर्म के ठेकेदारों से हो रही वार्ता,
मुखियां अपना दाम बढ़ाने लगे हैं।
देशवासियों वोट की कीमत जानो,
क्यों हम देश को मिटाने लगे हैं।
गुमनाम"पैदा हो गये काले अंग्रेज,
 देश को फिर गुलाम बनाने लगे हैं।राजेन्द्र "गुमनाम"

रविवार, 23 जून 2013

gumnam mai musafi

गुमनाम मैं मुसाफिर तेरे शहर का,
इतना तो बता तेरा ठिकाना है कहां,
भटक रहा हूँ मैं दर ब दर कब का,
अब ये तो बता मुझको जाना है कहां।
इस तरफ गुलशन महकता शबाब है,
उस तरफ मय के संग रखा कबाब है,
उलझ गया मैं कच्चे सूत के जाल में ,
अब दे भी मशवरा दिल लगाना है कहां।

मैं सच का व्यापारी हूं,
माल बिकता नही,
घाटे में चल रहा,
फिर भी ये धंधा छोड़ा नही मैंने।राजेन्द्र "गुमनाम"

दोस्तों दिल थाम के पढ़ना ये रचना

आंखों से आंसू दरिया जैसे निकले हैं,
हादसे में दिल के टुकड़े जब बिखरे हैं।
क़यामत आई तो गिनना हैं मुश्किल,
वो मरने वाले कौन कहां के कितने हैं।
गिनती के बचे हैं देश की सोचने वाले,
अधिकतर गद्दार देश के नेता जितने हैं।
अब मण्डी का दस्तूर अलग निराला है,
उनकी कीमत जितने भी घड़े चिकने हैं।
गुमनाम"तू अक्सर सम्भल के चलना,
बरबाद हुये जो राहे जिंदगी पे फिसले हैं।राजेन्द्र "गुमनाम"

desh ke neta

मेरे देश के नेता
पत्रकार - नेता जी देश में भयानक त्रासदी आई है,
इस मुश्किल घड़ी में समस्त देश वासी दुखी हैं,
पर आप के माथे पे शिकन नही,आप मंद मंद मुस्करा रहे हैं,
आखिर क्यों ???????
नेता ने उल्टा पत्रकार पे सवाल दाग दिया??
नेता- पत्रकार जी ये बताओ जब आप का वेतन बढ़ता है,
अथवा अन्य श्रोतों से अधिक धन प्राप्त होता है, आप रोते या हँसते है।
पत्रकार -जी खुश होते हैं हंसते मुस्कराते हैं।
नेता-ये त्रासदी ही तो हमें मोटा कमाने का मौका प्रदान करती है,
इस अवस्था में हम हंस मुस्करा रहे हैं तो आप के पेट में दर्द होने लगा।
क्या नेता कमाई बढ़ने पर हंसना भी बंद कर दे।राजेन्द्र "गुमनाम"

शनिवार, 22 जून 2013

yekya

मेरी वफा का ये सिला दिया तूने,
मझदार कश्ती को डुबा दिया तूने।
दिल के करीब तू मेरा मैं तेरा था,
फिर क्यों यूं ठेंगा दिखा दिया तूने।
मैं रोया कोई भी बचाने नही आया,
दर्दनाक मौत से मिला दिया तूने।
ये अफ़सोस गिला शिकवा तुझसे,
अपने इस मुरीद को भुला दिया तूने।
गलती मेरी भी मैं तेरी नही सुनता,
यूं समझाने को ट्रेलर दिखा दिया तूने।
"गुमनाम"हो गये हैं कई नाम वाले,
कुछ ऐसा कोहराम जो मचा दिया तूने।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ..........जय जय मां



शुक्रवार, 21 जून 2013

desh ko khak

देश को क्या खाक नुकसान पहुचाये गे???
बाहरी मुजरिम,
जब सदन की शोभा बढ़ा रहे हैं????
इश्तहारी मुजरिम।राजेन्द्र "गुमनाम"

mnn ke nam par

मनन के नाम पर मनोरंजन में लगे लोग,
अक्सर उसको दोष देते हैं।राजेन्द्र "गुमनाम"

kedar nath

जय भोले जय भोले
श्री केदार नाथ त्रासदी
धार्मिक स्थानों पर????
पिकनिक मनाने जाने वालो के लिए????
चेतावनी भी है।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी .......जय जय मां 

ik tera hi tha

दोस्तों पवित्र स्थल केदार नाथ में हुए हादसे में
मारे गये भक्तजनों को श्रदाजली आर्पित करते हुए
दुखी मन से भोले को उन बदनसीबों की शिकायत
 दर्ज करवाने के साथ एवं अर्ज कर रहा हूं

ओ भोले तेरा ही तो था सहारा हमको,
फिर क्यों घर में बुला के मारा हमको।
खौफनाक मंजर क्यों दिखाया हैं हमें,
जबकि देखना था मस्त नजारा हमको।
भोला बाबा कैसे बन गया है कातिल,
तानें दे रहा है अब जग सारा हमको।
 क्या खूब हुआ देखो रूतबा ये हासिल,
मुँह बना के कहता जग बेचारा हमको।
तू अर्ज सुन लाख चौरासी से बचाना,
देना इन्सान का जन्म दोबारा हमको।
हमारा रूदन क्यों अनसुना कर दिया,
अफ़सोस यही तो गम भारा हमको।
तूने जो किया वो अच्छा ही किया है,
बेशक तेरा हर अन्दाज प्यारा हमको।
"गुमनाम"जैसो की यही हैं तमन्ना,
इक बार करना दीदार तुम्हारा हमको।राजेन्द्र "गुमनाम"





गुरुवार, 20 जून 2013

bhole tu kyo

भोले तू क्यों रुठ गया,
इक तेरे रुठन के कारण,
लाखों का दिल टूट गया।
भोले क्यों तू ................
तू है बाबा भोला भाला,
ये बता तूने क्या कर डाला,
बिछुड़ गई है किसी की अम्मा,
बिछुड़ गया है किसी का लाला,
कट गई है किसी की गर्दन,
किसी का सिर है फूट गया।
भोले क्यों तू ................
विनाश लीला तूने ऐसी दिखाई,
मचा दी ये कैसी घोर तबाही,
भक्तों को ये तो समझ न आई,
दुष्ट बना क्यों सिर का साईं,
तेरी इस विनाश लीला से,
तेरे भक्तों का पसीना छूट गया।
भोले क्यों तू ................
आग लगी है मन के अन्दर,
बचा लिया तूने अपना मन्दिर,
इतना क्यों है गुस्सा खाया,
बाबा तू था मस्त कलन्दर,
ऐसा लगता है शिव भोले,
तेरा भक्तो से भरोसा उठ गया।राजेन्द्र "गुमनाम'
सुप्रभात जी ............जय जय मां


दोस्तों आप के लिए

मेरे हक़ में अब दुआ कर दे,
बीमारे इश्क की दवा कर दे।
तेरे बगैर जीना मुश्किल है,
तू मेरी हस्ती फना कर दे।
भूले नही हम वो ठंडा झोंका,
तेरे हाथों से फिर हवा कर दे।
काश यहाँ आये कोई मसीहा,
दिलों में उल्फत रवा कर दे।
ढूंढा बहुत मगर मिलता नही,
कोई उसके घर का पता कर दे।
गुमनाम"फिर जीने की सोचू,
जो हमनवा हसीन खता कर दे।"राजेन्द्र "गुमनाम" 

बुधवार, 19 जून 2013

tujhe bhi mja aata


दोस्तों की ऩजर

मेरा साथी नही कोई इस जमाने में,
तुझे भी मजा आता मुझे रूलाने में।
पास रह कर भी दूरी बना के रखता,
क्या शर्म आती है चेहरा दिखाने में।
तू खुद ही करता है करवाता मुझसे,
फिर क्यों उलझा देता मुझे बहाने में।
करने लगता है कभी मौत का तांडव,
खुद ही लग जाता फिर तू बचाने में।
मेरी तरफ कभी नजरे इनायत कर दे,
क्यों लगा रहता"गुमनाम"को सताने में।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ..................जय जय मां

मंगलवार, 18 जून 2013

jmin pe pair

जमीं पे रहना सोच सितारों की रखना,
तू खिजा में भी तलब बहारों की रखना।"राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ............जय जय मां 

सोमवार, 17 जून 2013

lole monibaba

देश की मौजूदा हालात पर
लिखी व्यंग्य कविता सिर्फ
सच्चाई पर आधारित है

 बोले मोनी बाबा बड़े ढंग से,
राहुल जी कुर्सी लो,
हम तो रहते दुखी बड़े तंग से,
राहुल जी कुर्सी लो।
चम्चागिरी की सारी हदे तोड़ दी,
इतिहास में नई लाइन जोड़ दी,
हम प्रधानमन्त्री है नंग से।
 राहुल जी कुर्सी लो।
हमें तो न अब कोई काम दूजा है ,
सोनिया मइया की करनी पूजा है,
तुम डोर हो हम है पतंग से,
 राहुल जी कुर्सी लो।
देश के लिए हमने बहुत काम किया है,
देखो भ्रष्टाचार का रिकार्ड बना दिया है,
दुनिया वाले भी हैं बड़े दंग से।
 राहुल जी कुर्सी लो।
प्रधानमन्त्री जी कुछ तो ध्यान करो,
अपने पद का न इतना अपमान करो,
क्यों देश को लगे हो जंग से।
राहुल जी कुर्सी लो। ................राजेन्द्र "गुमनाम"


tere didar ki

तेरे दीदार की हसरत बाकी,
वर्ना इस दुनिया में रखा क्या है।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ..............जय जय मां 

gumnam hi sahi

जनप्रिय राष्ट्रीय कवि
गुरु सी एम अटल को समर्पित ये रचना

गुमनाम ही सही इक नाम मिल गया,
भटके मुसाफिर को आराम मिल गया।
मेरे लिये तो बन्द हुये थे सारे मयखाने,
साकी की बदौलत मुझे जाम मिल गया।
रावण की कैद में दुखी थी परेशान सीता,
विरहा की मारी सीय को राम मिल गया।
मतलब की दुनिया में कीमत नही लगती,
उसकी किरपा मुझे मेरा दाम मिल गया।
बेइन्तह मिली है ख़ुशी तमाम मुझको,
यूं सूरदास को जैसे घनश्याम मिल गया।
"गुमनाम"पे हुई है"अटल"की मेहरबानी,
कलम के सिपाही को अब काम मिल गया।राजेन्द्र "गुमनाम"

रविवार, 16 जून 2013

sun gujarish sja

सुन साकी सजा दे मुझको,
अब तो रिंद बना दे मुझको।
लाल परी मुझे नही पीनी,
तू आँखों से पिला दे मुझको।
इक मुद्दत से भटक रहा हूं,
मन्जिल का पता दे मुझको।
सरका ले रूख से चिलमन,
हसीं जलवा दिखा दे मुझको।
मैं छोटा बच्चा रो रहा कब से,
इक झुनझुना दिला दे मुझको।
गुमनाम"को नाम की हसरत,
वर्ना दुनिया से उठा दे मुझको।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी .........जय जय मां


शनिवार, 15 जून 2013

bhartiya saskriti ka

भारतीय संस्कृति का ????
निकलता ?????
जनाजा देखिये,
हर शहर गांव में ??????
वृद्दआश्रम ??????
और वहां बुजुर्गों की भीड़।?गुमनाम"

दोस्तों रचना का नया  रंग कैसा लगा

अफ़सोस अब  न शरमाते बच्चें,
मां बाप पे ही हुक्म चलाते बच्चें।
अपनी हर जिद्द मनवाने के लिए,
मरने की धौंस भी दिखाते बच्चें।
अधिकतर तो कामचोर हो गये हैं,
काम को हाथ न अब लगाते बच्चें।
अपनों को एकदम भूलते ही जा रहे,
फोन नेट से तालमेल बिठाते बच्चें।
बच्चों की समझदारी तो बाकमाल है,
सबकुछ पेट में सीख कर आते बच्चें।
बेशक इनको सम्भालना ही होगा,
जीवन की बगिया को महकाते बच्चें।
बच्चों के साथ मैं अब बच्चा हो गया,
"गुमनाम"को बिलकुल न सताते बच्चें।"गुमनाम"

ab asulo ka

अब असूलों का मौसम नही रहा,
बेहतर होगा इन्हें खूंटी पे टांग दो।"गुमनाम"

हंसना जरुरी अब तो हंसना जरुरी है,
हंसी ख़ुशी बिना देखो जिंदगी अधूरी है,

हंसना जरुरी .......
जिंदगी की बहुत उंची चढ़ी पतंग है,
फिर भी इन्सान दुखी बहुत तंग है,
हर तरफ देखो जैसे छिड़ी हुई जंग है,
समझ न आये क्या जीने का ढंग है,
प्यार मोहब्बत का फीका हुआ रंग है,
अब  दूर जा बसी ख़ुशी रहती न संग है,
हर किसी को कोई न कोई मज़बूरी है।
हंसना जरुरी ...................गुमनाम"

गुरुवार, 13 जून 2013

punjabi song

sadi iko ae khri khri mang sajna,
tu pyar da sikh lai ve dhang sajna,
bhaidi duniya to ij n tu sang sajna,
sadi glli cho kde te hun lang sajna.
sadi glli cho kde .........................
mai lkh koshish kiti kreya jatan ve,
odi meharbani je lbheya ae tan ve,
aasa chad leya is te tera rang sajna,
sadi glli cho kde .............gumnam"

gir n jaye

गिर न जाये तू सहारा दे दे,
प्यासी आंखों को नजारा दे दे।
अर्श की हसरत नही है मुझको,
सिर्फ इक खिलता सितारा दे दे।"गुमनाम"

ro ro ke ktri

मौसम के मुताबिक रचना
आप दोस्तों की महफ़िल में 

चमकी बिजली तो होश खो दिये,
बरसी बरसात तो हम भी रो दिये।
रोगे इश्क दिल को लगा के हमने,
अपनी राहों पे खुद कांटे बो दिये।
उनसे बिछुड़े तो हम पे ऐसी गुजरी,
छोटे बच्चे ने जैसे चार आने खो दिये।
मेरी बरबादी पे खुदा छम छम रोया,
उसने आंसुओं से गुलाब बिगो दिये।
गुमनाम"को जीवन रास नही आया,
ले ले साँस वापिस जो मुझ को दिये।"राजेन्द्र गुमनाम"

बुधवार, 12 जून 2013

maa ki mehar

मां की मेहरबानी जो रोशन जहान देखा,
वरना गुमनाम"अन्धेरे में भटक रहे होते।"राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी .................जय जय मां 

मंगलवार, 11 जून 2013

mitti ke ghar

मिट्टी के घर हैं खाली खाली,
फिर ये बात तो सोचने वाली,
घर के मालिक को कोई न बुलाता है,
हर कोई इस घर को अपना बताता है।
अपना बताता इसे अपना............
भूल गया कसमें तोड़ दिये वादे,
बहारों को देख कर बदले इरादे,
आईने को देख कर इतराता है।
अपना बताता इसे अपना............
गुमनाम"ये बता क्या मजबूरी है,
घर के मालिक से कर ली दूरी है,
उसकी सुनता न तू अपनी चलाता है।
अपना बताता इसे अपना.........राजेन्द्र"गुमनाम"
सुप्रभात जी .............जय जय मां 

ham tdfte magr vo sunte hinhi

दोस्तों दिल पे हाथ रख के पढ़ना

तड़फते है हम मगर वो सुनते ही नही,
अफ़सोस पैरों से कांटें चुनते ही नही।
दिल दे दिया है अब जान भी उन्ही की,
फिर भी हंस के वो हमें मिलते ही नही।
गुलशन में बहारें आई रूखों पे जवानी हैं,
मेरे मन के फूल फिर भी खिलते ही नही।
रुप हुश्न दौलत का गुमान न कीजिये,
जो नीचे देख चलते वो तो गिरते ही नही।
प्यार से हमको चाहे कोई भी खरीद ले,
गुमनाम" हम तो पैसे से बिकते ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम "

itti ke ghar ko

दोस्तों सीरियल की स्क्रिप्ट लिखने का
अधुरा काम पूरा करने में जुट गया हूं,
अब मेरी रचनायें पढ़ने को कम मिलेगी
आज की पेशकश आप की महफ़िल में,

मिट्टी के घर को सजाया न गया,
डूबने से खुद को बचाया न गया।
नजरे इनायत उसकी आबाद हुये,
मगर चमन को महकाया न गया।
बाप के सहारे की लाठी न बन सके,
मां के दूध का कर्ज चुकाया न गया।
कहने को फेरी माला तिलक लगा के,
दिल के घर उसको बिठाया न गया।
गुमनाम"ने जिंदा रखा स्वाभिमान को,
हर चौखट पे सिर झुकाया न गया।"राजेन्द्र गुमनाम"

tere shar

दोस्तों की महफ़िल में प्याला ए दर्द।

इस तेरे शहर में ठिकाना न मिला,
जिन्दगी जीने का बहाना न मिला।
दिल के जख्मों ने हमें जीने न दिया,
अफ़सोस मौत का नजराना न मिला।
मतलब की हो गई अब सारी दुनिया,
मण्डी में बिन पैसे याराना न मिला।
छुपा के रखते कहां खजाना ए गम,
मुझको कोई ऐसा तहखाना न मिला।
गुमनाम"को शिकवा यही शिकायत है,
सारे शहर में कोई भी बेगाना न मिला।"राजेन्द्र "गुमनाम"

सोमवार, 10 जून 2013

chkkro se bchne ke liye

चक्करों से बचने के लिये खुद से समझौता कर लेना,
जीवन की रंगहीन तस्वीर में तू नाम का रंग भर लेना।
खुद से समझौता ............................................
कहने को बहुत उजाला है पर मन में गहन अंधेरा है,
जब वो नाम की ज्योति जाती होता तब ही सवेरा है,
बहती राम नाम की गंगा से 'गुमनाम"तू पानी भर लेना।
खुद से समझौता ..................................राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ....................................जय जय मां 

diwano jaisi halt

दिल तड़फे दीवानों सी हालत हो गई,
जिसे देखा न उससे मोहब्बत हो गई।
महफ़िल में सब करे मेरे यार के चर्चें,
अपनी कुछ ऐसी ही सुहबत हो गई।
उसने तो सब कुछ ही बख्शा मुझको,
 मेरी फिर भी रोने की आदत हो गई।
जिस थाली में खाना उसमें छेद करना,
इन्सान की कुछ ऐसी फितरत हो गई।
"गुमनाम"को अब तू सरेआम का दे,
गुमनामी से बहुत ही नफरत हो गई।"राजेन्द्र गुमनाम"

mn ki krna

दोस्तों को कैसी लगेगी मेरी ये रचना

मन की करना चाहती हर इक जिंदगानी,
मगर किस्मत फेर देती अरमानों पे पानी।
इस दौर में दिल पे कोई जोर नही चलता,
ये जवानी कर जाती है अक्सर ही नादानी।
नसीहत किसी को देना हादसे से कम नही,
बेशक आज की पीड़ी हो गई बहुत सयानी।
मरने के बाद भी तो वो मिटती नही स्याही,
दिल पे लिखी जो बरबाद इश्क की कहानी।
मालिक ने हुनर बक्शा फिर भी"गुमनाम"हूं,
कैसे सरेआम होते मैंने ये तदबीर नही जानी।"राजेन्द्र गुमनाम"

रविवार, 9 जून 2013

nta ki aawaj

जनता की आवाज
हमारा क्या ??????
हम ये भी कर के दिखा देते हैं,
पहले गांधी के?????
चेलों को अजमा के देख लिया,
अब सुभाष चंद्र बोस के चेले??
मोदी को भी अजमा के देख लेते हैं।"गुमनाम"


tujhse milna

तुझसे मिलना जरूरी है,
वरना जिन्दगी अधूरी है।
काट रहे हैं घास ही सारे,
यूं बेवजह की मशहूरी है।
अब न तो फिर कब मिलेगे,
और बढ़ जानी ये दूरी है।
कहने को तख्लुस सूफी,
पहली पसंद मुर्गा तंदूरी है।
कुछ फ़िक्र कर ले कल की,
सांस होने वाली पूरी है।
सरस्वती माँ के भक्त हम,
फ़कत करनी जी हजूरी है।"गुमनाम"
सुप्रभात जी ...............जय जय माँ 

ik shkhsjo

आज की आखिरी पेशकश प्यार के साथ

राजे दिल बताते क्यों नही,
भ्रम अब मिटाते क्यों नही।
खुश हो क्या पर्दे में रह कर,
चिलमन को हटाते क्यों नही।
तू हसीं तेरे जलवें हसीन हैं,
तुम नजारा दिखाते क्यों नही।
तू गरीबों का हमदर्द मेरे दोस्त,
घर मिरे तुम आते क्यों नही।
रोशन हो मेरी अँधेरी दुनिया,
इश्क की शमा जलाते क्यों नही।
"गुमनाम"के चक्कर खत्म हो,
रास्ता मंजिल का बताते क्यों नही।"राजेन्द्र गुमनाम"

jane wala de gya

दोस्तों हाथ रुक नही रहे लिखता जा रहा हूं
स्वीकार करे ये रचना

जाने वाला दे गया आंखों का पानी,
मेरे लिये तोहफा दोस्त की निशानी।
जिस हाल में रखे ये तो उसकी मर्जी,
नाम उसके ही कर दी मैंने जिंदगानी।
इश्क में दिल पे कोई जोर नही चलता,
गलियों में नाचती फिरे मीरा दीवानी।
हर तरफ नज़र आते हैं हसीन जलवें,
झूम के चढ़ती जब बेपरवाह जवानी।
बस इक यही तो तमन्ना हसरत मेरी,
आशिक"गुमनाम"की बने कोई कहानी।"राजेन्द्र गुमनाम"

gairo ko apna bnate sbhi

sun day spacial दोस्तों की महफ़िल में

 गैरों को अपना बनाते सभी,
अपनों को अपना बनाते नही,
करते वादा हम जान दे दे गे,
पर अमल कर के दिखाते नही।
शीशे के घर नजर आते सबके,
कोई बोले तो फिर क्यों बोले,
सोने दो जो सो रहा तान के लंबी,
शहर वाले किसी को जगाते नही।
भारत देश की बदकिस्मती देखो,
मसीहा हो गये निपट भ्रष्टाचारी,
नेता के दांत बिलकुल हाथी जैसे,
जो खाते वो तो नज़र आते नही।
गुमनाम" है तू तुझे क्या लेना,
दुनिया बदल रही चोंगा अपना,
इस बात का तो तू ध्यान रखना,
किसी उठते को कभी गिराते नही।"राजेन्द्र गुमनाम"

knya bhurn

कन्या भ्रूण हत्या बंद हो?????
मैं हरगिज नही चाहता ????
क्योकि बच्चियों की?????
दुर्गति देखी नही जाती।"राजेन्द्र गुमनाम"

apni tarif sun ke

अपनी तारीफ सुन के बहक जाती औरतें,
गुमनाम"यही तो इन की बड़ी कमजोरी है।"राजेन्द्र गुमनाम"

bdli n fir bhi aadt meri

जिन्दा लाश लिये भटके जिन्दगी दे दे ,
ये आखिरी ख्वाहिश तेरी बन्दगी दे दे।
बदला जमाना लोगों ने बदल हैं तेवर,
हम न बदले मेरे मौला तू सादगी दे दे।
मेरी जिन्दगी में अब अन्धेरा बहुत है,
हो तेरी रहमत इक किरण रौशनी दे दे।
मैं अपने बच्चे दिल को समझा लू गा,
मेरे हाथों मैं अब तू इक फुलझड़ी दे दे।
गुमनाम"को सरेआम होने की हसरत,
 मेरी कलम को पैनापन ताजगी दे दे।"राजेन्द्र गुमनाम"

फस जाते लोग अक्सर बातों के जाल में,
पछताते हैं बहुत जब रास्ता नही मिलता।"रैना"



यहां कोई नही सहारा किसी का,
खुद ही खुद का बनना पड़ता है।"राजेन्द्र गुमनाम"

बेशक यहां कोई झूठ नही बोलता,
फिर भी विश्वास नाप तोल के करो।"राजेन्द्र गुमनाम"

शुक्रवार, 7 जून 2013

htke hai

मेरे दिल की रचना आप के लिए दोस्तों,

भटके हैं बहुत थोड़ा आराम दे दे,
मेरी मेहनत का कुछ इनाम दे दे।
हम ठंडे पानी से गुजर कर लेगे,
मैंने कब कहा मुझे तू जाम दे दे।
नाकामी ने तो मायूस कर डाला,
मेरे हाथों को अब कोई काम दे दे।
रूख से चिलमन सरका के जाना,
हम तेरे आशिक ये इल्जाम दे दे।
मेरे बाद भी महफ़िल में हो चर्चें,
गुमनाम"को कोई ऐसा नाम दे दे।"गुमनाम"

gar aap

दोस्तों ????
गर आप चाहे,
तो कुछ सुनाये।"गुमनाम"

बुधवार, 5 जून 2013

kisi ki

किसी की औकात अब पैसे से मत आंको,
अधिकतर ठग अब पैसे वाले हो गये हैं।"गुमनाम"
सुप्रभात जी .............            जय जय मां 

schi bat ras n aati hai

दोस्तों आप की महफ़िल ये
रचना
सच्ची बात रास न आती है,
दिल में सुई सी चुब जाती है।
मां की ममता का क्या कहना,
अक्सर बचा खुचा ही खाती है।
पीने वालो ने जब तेवर बदले,
हैरान परेशान दुखी साकी है।
जिन्दा लाश उठा रखी कंधों पे,
जां निकले जब याद आती है।
अब इन्सान की फितरत ऐसी,
जैसे कोई नदी वो बरसाती है।
गुमनाम"हो गया आशिक तेरा,
अब तू ही मेरा जीवन साथी है।"राजेन्द्र "गुमनाम"



netao ke wyawahar se

नेताओं के व्यवहार से दुखी जनता सारी है,
अब तो ज्वालामुखी के फटने की तैयारी है।
हर इक सीने में दर्द दबा हुआ इक तूफान है,
दिल की खूनी लहरों में आया हुआ उफान है,
बुझदिली कब इन भारतियों की पहचान है,
देश के खातिर मर मिटना  हमारी शान है।
बेशक हमें सिर्फ इक सीमा का ही ध्यान है,
जब ये काले अंग्रेज हर सीमा लाँघ जाये गे,
भारत मां के दीवाने बसंती चोले रंगवाये गे,
हाथ में तिरंगा ले इंकलाब के नारें लगाये गे।
भारत माता फिर से आजाद करवाये गे।गुमनाम"

मंगलवार, 4 जून 2013

aaj fir

आज फिर दिल को समझाया बहुत,
वो नही माना मैंने तो मनाया बहुत।
राहे इश्क पे रोशनी हासिल न हुई,
दिल को मंनिद शमा जलाया बहुत।
देख जलवें आखिर हो गया बिस्मिल,
तीरे ऩजर से दिल को बचाया बहुत।
गर उठता नही तो उसकी मर्जी अपनी,
वैसे इन्सान को वक्त ने जगाया बहुत।
गुमनाम"अपनी औकात नही समझा,
खुद को खुद ने आइना दिखाया बहुत।गुमनाम"

tummujhe jab yad

तुम मुझे जब याद करते,
एहसास मुझको होने लगता,
ये खबर है तुझे भी
दिल से दिल के तार जुड़े होते हैं,
तेरी आँखों से भी छलकते होगे आंसू,
तुझको याद कर जब हम रोते हैं।
पुरानी किताबों से जब मिलते मुरझाये फूल,
दिल पे आरी सी फिर चलती है,
परवान इधर न तड़फता अकेला,
बेबस शमा भी उधर जलती है।"गुमनाम " 

durga ashtk

दोस्तों मां की किरपा से मेरा द्वारा लिखा गया
 दुर्गा चालीसा किताब का हिस्सा
               दुर्गा अष्टक

दुर्गा रानी कत्ययानी मुझ पे किरपा कीजिए,
भक्ति में तेरी मन रमे मोहे ऐसा वर मां दीजिए।
बंधन तोड़ू तोसे जोड़ू छोड़ दू इस लोक को,
मन समझ के तोसे ला के सफल करू परलोक को।
मुख ये खोलू जय मां बोलू चरणों में तेरे सिर धरु,
मोह माया को छोड़ के मां तेरा ही मैं जप करू।
मैंने माना ये भी जाना मतलबी संसार है,
साचा नाम है मां अम्बे का बाकी सब बेकार है।
शेरो वाली मां निराली दर्शन की अभिलाषा है,
हो गे दर्शन सुख मिले अब चाहू और निराशा है।
दुष्ट नाशक भक्त पालक कम करो ये दूरियां,
वरदानी मां कात्यायनी समझो भी मजबूरियां।
सुर आसुर मां दास तेरे करे हैं भक्ति शिव हरी,
सजिदा करते चंद तारे ऋतु  मां तेरे दर खड़ी।
गुमनाम"तेरा तुझसे खैर मांगे भक्ति तेरे नाम की,
जल बिना ज्यो मछली तड़फे जिन्दगी किस काम की। गुमनाम"
सुप्रभात जी ...................जय जय मां

gila kiss gal

punjabi sad song

gilla kedi gall da kra sajna,mere te bhaide nsib chandre,
kitte mai jatn lakh dva daru kita puthhe pai gye tbib chandre.
haye nsib chandre ....................................................rajinder "gumnam"

सोमवार, 3 जून 2013

hans ke meri tarf

दोस्तों मेरी ये रचना शीघ्र ही
 सुनने को मिले गी,आप का क्या ख्याल

हंस के मेरी तरफ देखो,
दिल का जख्म भर जाये गा,
फिर तुझे बेवफा कह कर,
कोई हरगिज न आंसू बहाये गा।
कौन देखता अब मिट्टी के घर को,
शीश महलों पे ऩजर सबकी,
"गुमनाम"मुसाफिर हम शहर के,
मेरा नाम तेरी जुबां पे न आये गा।"गुमनाम"

ab ham duniya

गुमनाम तू मत आना इस दुनिया की बातों में,
दुनिया मतलब के लिए दिन को रात कह देती।"गुमनाम"

ghar ghar ki

आओ हंस ले

घर घर की ये कहानी मेरे भाई,
सास बहु लड़े या ननद भौजाई,
आदमी की होती बेवजह ठोकाई,
हमने क्वारे रह के इज्जत बचाई।गुमनाम"

koi khta


माहताब कहता कोई आफ्ताब हो गया हूं,
सच मानो तो गणित की किताब हो गया हूं,
हल नही कर पा रहा मैं जिन्दगी का सवाल,
"गुमनाम"परेशान दुखी बेहिसाब हो गया हूं।"गुमनाम"

sucheya n vichareya kujvi

punjabi sad song

socheya n vichreya kuj dil da sauda kar baithhe,
hun rude pachhtade ha jinde ji assi mar baithhe.
dil da sauda kar baithhe ...........................................
sadi ulft n jwan hoi kwari hi vidwa ho gai,
vasl di kida rat aadi kismt lmbi tan ke so gai,
sade to jo khta hoi assi oada jurmana bhar baithhe.
dil da sauda kar baithhe............................"gumnam"

रविवार, 2 जून 2013

pas rh kr bhi

पास रहकर दूर रहना ये नही अच्छा,
तू हटा चिलमन दिखा दे चेहरा अपना,
बैठ मेरे साथ कर कुछ बात दिलकी भी,
हो न ऐसा फिर कभी जब हम मिले दोस्त,
मैं नजर तुझसे मिलाने से डरु हरपल,
रंग मुझपे अब चढ़ा ऐसा हसीं पक्का,
जो उतारे भी नही उतरे कभी हमदम,
चैन से फिर जिन्दगी मैं काट लू दोस्त।"गुमनाम"
सुप्रभात जी ...............जय जय मां 

sdiyonse

सदियों से बदल रहा कपड़े,
अब तू बता ??????
तेरे रंग का कपड़ा कैसे मिले गा,
इस शहर में सब बहकाने वाले।"गुमनाम"

hai khfa

तू खफा मुझसे नसीबों की तरह,
जख्म देता क्यों रकीबों की तरह,
काश मेरा दरद समझे तू कभी,
फिर मिले मुझको हबीबों की तरह।"गुमनाम"

क्या तारीफ करे अल्फाज नही हैं,
हर लफ्ज सादगी बयान कर रहा,
हर लाइन इक किताब सी लिख रही है।

kash aesimeri

काश ऐसी मेरि ये तकदीर हो जाये,
हम मिले तुझसे ऐसी तदबीर हो जाये,

तू मेरी तकदीर बदल सकता था,
हाथों की लकीर बदल सकता था,
गर तूने "गुमनाम" बचाना होता,
फिर तो शम्शीर बदल सकता था।"गुमनाम"

हम से अंदाज बदला न गया,
तुम से रिवाज बदला न गया,
दुनिया ने सब कुछ बदल डाला,
उल्फत का मिजाज बदला न गया।गुमनाम"

i hoya je sanu

ki hoya je sanu tera pyar nhi mileya,
sone jigri yara da aetbar nhi mileya,
fer vi assi tera aadar satkar krde ha,
jan to pyare sajna tainu pyar krde ha.
tainu pyar krde ha ............................
shahar de kai musafir gumnam rah gye,
fer vi tere dite dard hans hans ke sah gye,
assi halle vi tere te dilo jaan nisar krde ha.
tainu pyar krde ha ...........................".gumnam"

log to chain

लोग तो चैन से सोते हैं,
मैं और मेरे गीत रोते है।
खाक समझे जमाने वाले,
इश्क दे दर्द ऐसे ही होते हैं।"गुमनाम"

मुरसद के कदमों में हमने सिर धर दिया,
मैं रैना काली अटल ने गुमनाम कर दिया,
मुरसद की रहनुमाई में मजा तमाम आयेगा,
इक दिन गुमनाम भी सरेआम हो जाये गा।।"गुमनाम"

शनिवार, 1 जून 2013

mere ik walka

तू मेरे चन्द सवालों का जवाब दे दे,
आखों से बहते पानी का हिसाब दे दे,
जिन्दगी तो दे नही पाया तू मुझको,
"गुमनाम" को कजा का ख़िताब दे दे।"रैना"
बातों की बात
बरगद का पेड़ हूं तूफान भी हिला न पाये गा,
मैं क्रिकेट मैदान में गढ़ी गई विकेट नही,
जिसे जो चाहे उखाड़ ले जाये गा।"गुमनाम"

ar mhfilme teri

दोस्तों सूफी गीत आप की महफ़िल में

हर महफ़िल में तेरी चर्चा मस्जिद ओ बुतखाने में,
तू हंसीन खूबसूरत कोई तुझ सा नही जमाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................
उगते सूरज की लाली दिन की दोपहर भी हसीं शाम तू,
जिसको पीने को मन तरसे भरा अमृत कलश जाम तू,
एक है तू तेरे नाम बहुत अल्ला राम रहीम घनश्याम तू,
मन माने तो सब कुछ तू ही गर न मानो तो गुमनाम तू,
हर पल तू लगा रहता हैं बेसुमार अपने जलवें दिखाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................गुमनाम"

sham dhlti dekh

शाम ढलती देख तेरी याद आई,
याद तूने भी मुझे दिन में नही किया।"गुमनाम"

शुक्रवार, 31 मई 2013

मेरे अपने कसने लगे लंगौटें देखो,
लगता है कबड्डी खेलनी ही पड़े गी।"गुमनाम"

काश मैं भी सरेआम होता,
यूं मुसाफिर न गुमनाम होता।

mujhe dekh akr

मेरे अपने कसने लगे लंगौटें देखो,
लगता है कबड्डी खेलने ही पड़े गी।"गुमनाम"

chand sirfiro

चन्द सिरफिरों ने???
हिंदुस्तान बदनाम कर दिया,
वरना यहां श्री राम जी
भिलनी के झूठे बेर खाते है।"रैना"

nisndeh

निसंदेह जानवर सद कर्म कर के ????
कम कर रहा है चक्कर,
ये इन्सान???????
चक्करों से डरता ही नही।"गुमनाम"

dhsrti

धरती की शान हैं पौधें,
जीवों की जान हैं पौधें।
फल फूल छाया भी देते,
बड़े ही दयावान हैं पौधें।
आओ और पौधें लगाये,
जीवन को खुशहाल बनाये।
प्रदूषण खतरे की निशानी,
मुश्किल में हो जिंदगानी।
पौधे ही हमें बचा सकते हैं,
स्वच्छ हवा बना सकते हैं।"गुमनाम"
सुप्रभात जी ......जय जय मां



desh ke dushmno

देश के दुश्मनों से लड़ने के लिए,
मैं कलम की धार तेज करने लगा हूं।"गुमनाम"
मैं जो चमकना चाहता हूं तो मेरी क्या गलती,
इक जर्रा भी आफ्ताब बनने की ख्वाहिश रखता है।"गुमनाम"
मैं मुसाफिर गुमनाम भटक रहा था मुद्दत से,
अब ऐसा लगता जैसे मंजिल मिल गई मुझे।"गुमनाम"

 वो तो कोई और थे ????
गिरते को थामने वाले,
अब तो?????
 गिरा के सीने पे पैर रख,
गुजर जाते हैं लोग।"रैना" 

main gumnam musafir

मैं मुसाफिर गुमनाम भटक रहा था मुद्दत से,
अब ऐसा लगता जैसे मंजिल मिल गई मुझे।"रैना"
दोस्तों आज मेरे लिए बड़ा ख़ुशी का दिन है,
राष्ट्रीय कवि "सी एम अटल" जी ने
मुझे अपना शिष्य स्वीकार कर लिया है,
और मुझे "राजेन्द्र गुमनाम" नाम दिया है।
आज मैंने अपना तख्लुश रैना"से बदल कर
"गुमनाम"रख लिया है। जय जय मां 

hindustan

दोस्तों मेरे द्वारा लिखित ये देश भक्ति आप को शीघ्र ही
सुनने को मिलेगा इस बारे अपने विचार दे,

हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान मेरा प्यारा हिन्दुस्तान,
इसके चार गहनें हिन्दू सिख इसाई मुस्लमान।
हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान .................................
 विभिन्न जाति धर्मों की यहां खुशबू आती है,
हर दस बीस कदमों पे बोली ही बदल जाती है,
अनेकता में एकता मेरे भारत की है ये पहचान।
हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान ........................."रैना"


गुरुवार, 30 मई 2013

aaj maine suna

आज मैंने ये सुना इन्सान हैं हम,
ईशवर की अनूठी सन्तान हैं हम।
जिस कद्र हमारे कर्म हो गये अब,
उसको देख कर लगे शैतान हैं हम।
अपनी ही पीठ थपथपाने में लगे,
सच में बेवकूफ मुर्ख नादान हैं हम।
वफा के मतलब से अनजान हुये,
खुद को समझते भगवान हैं हम।
धर्म का रास्ता ही छोड़ दिया हमने,
मोह माया भोग पे कुर्बान है हम।
"रैना"इस का फल तो भोगना पड़े,
जो इन्सान हो के बने हैवान हैं हम।"रैना"
सुप्रभात जी ....................जय जय मां 

merepyare

दोस्तों कुछ ध्यान करे,गौर से पढ़े

 मेरे भारत की घट रही शान है,
क्योकि मसीहा अब बेईमान है।
क्योकि मसीहा .......................
भारत माता अब छम छम रोती,
जैसा होता राजा वैसी प्रजा होती,
नेताओं को देश का कोई न ध्यान है।
क्योकि मसीहा .......................
सिर पे उठा रखा उसके अवशेष को,
गाँधी के नाम पर लूट खाया देश को,
इनका अपना न कोई भी निशान है।
क्योकि मसीहा .......................
अर्ज करे"रैना"सुने ये जनता प्यारी,
किसी को भी चिन्ता नही है तुम्हारी,
सलामत रखनी भारत की पहचान है।
गद्दार नेताओं की बंद करनी दुकान है।
क्योकि मसीहा ......................."रैना"


tauba tauba

तौबा तौबा तेरी दिलकश अदायें,
बिजली गिरा के बेहाल कर दिया,
हुस्ने मलिका क्या तारीफ करे,
तूने कमाल बा कमाल कर दिया।
हम शिकायत तो नही कर सकते,
कह रहे है सिर्फ दर्दे दिल अपना,
जिसने अभी जीना था चार घड़ी,
बेवक्त बेमौत उसे हलाल कर दिया।"रैना"

बुधवार, 29 मई 2013

sham dhlte hi

सूफी गीत

शाम ढलते  ही,दीप जलते ही,
याद तेरी आयेये,जान मेरी जायेये।
मन्दिरों में गूंजे घंटी,
मस्जिद में आजान हुई,
याद तेरी तब देखो तो,
मुझ पे मेहरबान हुई,
बोली कसमें पूछे वादे,
ये बता क्यों बदले इरादे,
गौर करे उन बातों पे,रूह मेरी घबरायेये "रैना"

so n ju

सो न जाये हम हमें अक्सर जगा के रखना,
हम तिरे बच्चें हमें बहला हंसा के रखना।
गर खता कोई करे तो रोक देना हमको,
राम मेरे बद करम से तू बचा के रखना।"रैना"
सुप्रभात जी ..........................जय जय मां 

hukhi mrti jnta

भूखी मरती जनता????
और सड़ता अनाज,
दे रहा आवाज ?????
यहां की व्यवस्था????
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है,
यूं तो नेता??????
शान से जी रहे हैं,
मगर इनकी आत्मा मर गई है।"रैना"

njrose

नजरों से जो गिर जाता,
उसका उठना मुश्किल है,
अक्सर गल्ती कर जाता,
आवारा पागल दिल है।
क्यों घबराता है "रैना"
तू तो सब कुछ कर सकता,
कुदरत ने हिम्मत बख्शी,
चोटी चढ़ने काबिल है।"रैना" 

gam smbhle rhne

गम को सम्भाले रखने को,
 बैंक में ले लिया लाँकर है,
चिन्ता अब न फिकर रही,
गम कोई चुरा न पाये गा,

बेशक ख़ुशी इक धोखा है,
ये गम ही साथ निभाये गा।
जिन्दगी का सफर तन्हा ही,
हम काटे गे सच मस्ती में,
चुपके चुपके रोने में अब,
"रैना"मजा बहुत ही आयेगा।"रैना"

मंगलवार, 28 मई 2013

tnha tnha

सूफी गीत

तन्हा न कहो मुझको,
मेरे पास न तन्हाई है,
मैं भला फिर तन्हा कैसे,
संग सांवरे प्रीत लगाई है।
मोरे सांवरे से मिल गये नैन,
पल भर भी न आये मोहे चैन,
मैं दीवानी मैं दीवानी मैं दीवानी हो गई,
मैं को मैं भूल बैठी,खुद से बेगानी हो गई,
मैं दीवानी .........................
होठों पर सजना पी का नाम है,
हर तरफ मेरा श्याम ही श्याम है,
दिन भी वो मेरी रात भी वो,
दीन धर्म मेरी जात भी वो,
उसके बिना मैं हूं अधूरी,
पी से मिलन हो हो जाऊ पूरी,
सुन ले विनती अर्ज तू मेरी,
श्यामा और न कर अब देरी,
बरबाद ये मेरी जवानी हो गई।
मैं दीवानी मैं दीवानी ............"रैना"
सुप्रभात जी ............जय जय मां

kbhi tanhaiyon me

कभी तन्हाइयों में जब तेरी याद आती है,
तड़फने लगता दिल जान निकल जाती है,
बता इतना तो मुझको ये है माजरा कैसा,
तूने बीच में छोड़ा साथ तेरी याद निभाती है।"रैना"

mai sharab

दोस्तों गुस्ताखी माफ़

मैं शराब को अच्छा कैसे कह दू,
इसने तो लाखों के घर उजाड़े हैं,
यूं रिन्द रहे होगे चाहे मस्ती में,
मय ने औरत बच्चों पे कहर गुजारे हैं।"रैना"

ham dhlte hi

शाम ढलते ही काटते काले कुत्ते,
हम दिन गुजार देते पानी पीकर,
मेरे हाल पे न हंसो इस कद्र दोस्तों,
इस हाल में पहुंचे हम जवानी पीकर।।"रैना"


teri murt ko dil

 अफ़सोस ये अपना बना न पाये,
 गम है तुझे दिल से हटा न पाये,
 यूं आग ने घर को जला दिया है,
 हम दीप उल्फत का जला न पाये।"रैना"



jame jahr jindgiko

जाम ए जहर जिन्दगी पी के देख लिया,
हमने तेरे शहर में अब जी के देख लिया,
खून रुका नही निरन्तर बहता ही रहा है,
दिल पे लगे जख्मों को सी के देख लिया।"रैना"

सोमवार, 27 मई 2013

tum chhup chhup krte ho

यार की शान में सूफी गीत

छुप छुप करता है प्यार,
बेसुमार,मेरे यार,दिलदार,
मैंने करना है तेरा दीदार,
इक बार,इस पार,सुन यार।
मेरे यार दिलदार .............
तेरा ही मुझ पे असर है,
इतनी तो मुझे भी खबर है,
हरपल मेरी करता फिकर है,
मिट्टी का ये तेरा ही घर है,
तू ही दो के करता है चार।
मेरे यार दिलदार .............
मैंने न निभाई प्यार की रस्में,
भूल गया मैं खाई जो कसमे,
मुझ को तो इतना पता है,
रैना"अब हो गया बेवफा है,
तुझ से आँखें न करता चार।
मेरे यार दिलदार ............."रैना"
सुप्रभात जी ..........जय जय मां


रविवार, 26 मई 2013

mere ghar men

मेरे घर में अम्बे रानी,
रहना तुम स्वीकार करो,
तुच्छ दास हम तेरे हैं,
हम पे ये उपकार करो।
प्यार करो मां प्यार करो,
प्यार करो मां ...............
दूर तलक अन्धेरा है,
उजाला नजर नही आता,
तेरे सिवा इस दुनिया में,
रखवाला नजर नही आता,
मरुस्थल में भटक रहा हूं,
भव से मुझको पार करो।
प्यार करो मां ..................
इतना कर्म मां मेरी करदे,
भूल का मैं सुधार करू,
हर नारी में मेरी माता,
तेरा ही मैं दीदार करू,
मेरे जीवन की बगिया को,
मईया जी गुलजार करो।
प्यार करो मां ............."रैना"
सुप्रभात जी .............जय जय  मां





tere bare me

दोस्तों ये ग़ज़ल है मात्र 16
2 +2 +2 +2 +2 +2 +2 +2

 तेरे बारे सोचा करते,
तन्हा बैठे रोया करते।
तेरी दुनिया को क्या कह दे,
हमदम दोस्त धोखा करते।
ये दिल तेरा दीवाना है,
ये कब माना हम क्या करते।
इस से अच्छा अब मर लेते,
गम अब घर का मौका करते।
 तुम मेरे अपने हो जाते,
उससे हम क्यों शिकवा करते।
"रैना" टूटा कब बिखरे गा,
दोस्त अब ये पूछा करते।"रैना"

grmi se ghbra

 इस मौसम में दोस्तों की नजर

घबरा रहे हैं लोग गरमी से मुझे बरसात का डर है,
बेशक फ़िकर मुझको लगी हरपल यही कच्चा मिरा घर है।
ये सच गुमां करता नही हर हाल में खुश है यही फितरत,
झुकता मिरा सिर तो वही जिस भी गली में यार का दर है।"रैना"

wqt ke sath

रविवारीय स्पेशल दोस्तों की महफ़िल में,

मंद मंद मुस्कराया न करो,
मेरा दिल जलाया न करो।
हम डूबे नशे में हर घड़ी,
चश्मे मय पिलाया न करो।
देख कर तुझे कलियां चटके,
गुलशन में कभी जाया न करो।
मिल न जाये दम से फुरसत,
कातिल अदा दिखाया न करो।
दोनों में राज रहता कायम,
"रैना"तीसरे को बताया न करो।"रैना"