रविवार, 14 जुलाई 2013

marna marna kyo ab karna

संडे स्पेशल दोस्तों के लिए खास

मरना मरना क्यों अब करना,
जीने की बस बात करे,
जहां भी जाये जिस महफ़िल में,
खुशियों की बरसात करे।
 जहां भी जाये ............................
चार दिन की है जिंदगानी,
न जाने कब खत्म कहानी,
 आँखों में मत लाना पानी,
अफ़सोस क्यों जब चीज बेगानी,
टूटे बिखरे धागें जोड़े,
हंस हंस के मुलाकात करे।
जहां भी जाये ..........................
मिठ्ठे मिठ्ठे बोल हम बोले,
यूं कानों में मिश्री सी घोले,
मन के बाद दरवाजे  खोले,
अपने तराजू में सच तोले,
गुमनाम"मशहूर जो जाये,
जो नेक अपने ख्यालात करे।
जहां भी जाये .......................राजेन्द्र "गुमनाम"







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