दोस्तों की नजर इक ग़ज़ल
हम मोहब्बत कर ले कैसे,
टूटे दिल शीशे के जैसे।
दुःख पीड़ा गम आहे नाले,
उल्फत के रस्ते हैं ऐसे।
अब दुनिया तो मतलब की है,
उससे रिश्ता जिस पे पैसे।
अच्छे कर्मों का फल मिलता,
मिल जाते जैसे को तैसे।
गुमनामी से कुछ नही हासिल,
घर चल दिये जैसे थे वैसे "राजेन्द्र गुमनाम"
हम मोहब्बत कर ले कैसे,
टूटे दिल शीशे के जैसे।
दुःख पीड़ा गम आहे नाले,
उल्फत के रस्ते हैं ऐसे।
अब दुनिया तो मतलब की है,
उससे रिश्ता जिस पे पैसे।
अच्छे कर्मों का फल मिलता,
मिल जाते जैसे को तैसे।
गुमनामी से कुछ नही हासिल,
घर चल दिये जैसे थे वैसे "राजेन्द्र गुमनाम"
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