मंगलवार, 2 जुलाई 2013

tujhse mohbbt kar

दोस्तों की नजर इक ग़ज़ल

हम मोहब्बत कर ले कैसे,
टूटे दिल शीशे के जैसे।
दुःख पीड़ा गम आहे नाले,
उल्फत के रस्ते हैं ऐसे।
अब दुनिया तो मतलब की है,
उससे रिश्ता जिस पे पैसे।
अच्छे कर्मों का फल मिलता,
मिल जाते जैसे को तैसे।
गुमनामी से कुछ नही हासिल,
घर चल दिये जैसे थे वैसे "राजेन्द्र गुमनाम"



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें