एक व्यंग्य कविता,
वाह मेरे देश के नेता,
अपने कुत्ते पर हर रोज??????
500 रूपये खर्च कर जाते है,
और गरीब जनता को?????
पांच रूपये में खाना खिलाते हैं।
नेता हाव भाव ऐसे दिखाते हैं,
जैसे वो नर्क लोक में होटल चलाते हैं,
क्योकि धरती लोक में ऐसा कुछ????
नजर नही आता जहां गरीब का मन खिलता हो,
और पेट भर खाना एक,पांच,12 रूपये में मिलता हो।
अब लगता हैं ये नेता कुछ नया करके दिखाये गे,
गरीबी मिटाने के लिये गरीबों को जड़ से मिटाये गे। राजेन्द्र "गुमनाम"
वाह मेरे देश के नेता,
अपने कुत्ते पर हर रोज??????
500 रूपये खर्च कर जाते है,
और गरीब जनता को?????
पांच रूपये में खाना खिलाते हैं।
नेता हाव भाव ऐसे दिखाते हैं,
जैसे वो नर्क लोक में होटल चलाते हैं,
क्योकि धरती लोक में ऐसा कुछ????
नजर नही आता जहां गरीब का मन खिलता हो,
और पेट भर खाना एक,पांच,12 रूपये में मिलता हो।
अब लगता हैं ये नेता कुछ नया करके दिखाये गे,
गरीबी मिटाने के लिये गरीबों को जड़ से मिटाये गे। राजेन्द्र "गुमनाम"
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