रविवार, 28 जुलाई 2013

jine ki tmnna

जीने की तमन्ना नही मरने की सोचने लगे हैं,
अफ़सोस है यही ये कुत्ते फिर से भोकने लगे हैं।
क्या करे गा जा कर वहां आराम बिलकुल नही,
कुछ तो ये कह कर भी रास्ता मेरा रोकने लगे हैं।
जब से उन्होंने सुनी मेरी तैयारी की खबर यारो,
अब वो मेरे बारे में कुछ अच्छा ही सोचने लगे हैं।
जिन्दगी जीने में अब तो लुत्फ़ सा आने लगा है,
जब से मुझे वो अपना समझ कर टोकने लगे हैं।
गुमनाम" जब से उसने शुरू कर दी  तारीफ मेरी,
तब से तो हम भी जम के आईना देखने लगे हैं। राजेन्द्र 'गुमनाम" 
     

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