शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

tute pttoki

दोस्तों के लिए खास

टूटे पत्तों के मान्निद बिखर जायेगे,
ये तो खुदा जाने फिर किधर जायेगे।
इतने हसीन जलवें हरगिज न होगे,
होगा गुप अन्धेरा हम जिधर जायेगे।
सोचने से बेहतर कर्म ही किया जाये,
फिर तो निश्चत है उसके घर जाये गे।
सच की राह पे"रैना"जो भी चलते हैं,
बेशक उन के तो जन्म संवर जाये गे।राजेन्द्र "रैना"

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