पर्दानशी ओ पर्दानशी,
हटा पर्दा दिखा जलवा,
गुलामों के शहर में सिर्फ चंमचों की कद्र होती है,
अब आम जिन्दगी तो बस चौराहे पे खड़ी रोती है,
देखो मंहगाई ने अब तो जीना हराम कर दिया है,
शराबी की बीवी चार बच्चों की मां भूखी सोती है।"राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी .......................जय जय मां
हटा पर्दा दिखा जलवा,
गुलामों के शहर में सिर्फ चंमचों की कद्र होती है,
अब आम जिन्दगी तो बस चौराहे पे खड़ी रोती है,
देखो मंहगाई ने अब तो जीना हराम कर दिया है,
शराबी की बीवी चार बच्चों की मां भूखी सोती है।"राजेन्द्र गुमनाम"
सुप्रभात जी .......................जय जय मां
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