मंगलवार, 2 जुलाई 2013

he yuwa

दोस्तों मेरी आप सब से हाथ जोड़ कर
विनती है ये कविता जरुर पढ़े

हे युवा हो खड़ा,
वक्त है नाजुक बड़ा,
नीम पर करेला चढ़ा,
हो गया कड़वा बड़ा।
तू बता किस से डरा,
घर तू सोया पड़ा,
मां तुझे पुकारती,
रस्ता तेरा निहारती।
हो गये हमले बड़े,
दुश्मन तलवार लिए खड़े।
मसीहा बेईमान हैं,
खोले बैठे दुकान हैं,
देश की चिंता न फिकर हैं,
बस अपना ही जिकर हैं।
सिर्फ लाइनें हैं खींचते,
अपना पेट ही पीटते।
चम्मचागिरी अब आम हैं,
इसी में उलझे तमाम हैं।
नीयत में सबकी खोट है,
मतलब सबका नोट है।
बस काम इतना कर रहे,
विदेशी बैंक हैं भर रहे।
युवाओं इतना काम करो,
गद्दारों का इंतजाम करो।
वरना वो दिन फिर आये गा,
मेरा देश गुलाम हो जाये गा।
ये अर्ज करता गुमनाम है,
अब होने वाली शाम है। राजेन्द्र "गुमनाम"


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