दोपहर करारी धूप में शाम का जिकर,
करते हैं वो लोग जिन्हें रात की फ़िकर।
क्यों करता मेरी मेरी तेरा कुछ भी नही,
उसका ही सब कुछ है तू देख ले जिधर।
अपने दिल को लगा ले तू उसके रास्ते,
वर्ना जिन्दगी की बड़ी मुश्किल है डगर।
हाथ जोड़ सब से कर राम दुआ सलाम,
करता जो किसी की उसकी होती कदर।
वो देख रहा है ऐब तेरे गुनाह तमाम जो,
हरपल हर घड़ी उसकी तुझ पे है नज़र।
गुमनाम"तू भी जी ऐसे औरों के वास्ते,
सीना ताने खड़ा सेवा में जैसे बूढ़ा शजर।राजेन्द्र "गुमनाम"
शजर =पेड़
सुप्रभात जी ................जय जय मां
करते हैं वो लोग जिन्हें रात की फ़िकर।
क्यों करता मेरी मेरी तेरा कुछ भी नही,
उसका ही सब कुछ है तू देख ले जिधर।
अपने दिल को लगा ले तू उसके रास्ते,
वर्ना जिन्दगी की बड़ी मुश्किल है डगर।
हाथ जोड़ सब से कर राम दुआ सलाम,
करता जो किसी की उसकी होती कदर।
वो देख रहा है ऐब तेरे गुनाह तमाम जो,
हरपल हर घड़ी उसकी तुझ पे है नज़र।
गुमनाम"तू भी जी ऐसे औरों के वास्ते,
सीना ताने खड़ा सेवा में जैसे बूढ़ा शजर।राजेन्द्र "गुमनाम"
शजर =पेड़
सुप्रभात जी ................जय जय मां
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