बुधवार, 3 जुलाई 2013

teri aankhon me

दोस्तों प्यारी सी रचना आप के हवाले

तेरी आँखों में डूब के मर जाये तो अच्छा,
ये जिंदगानी नाम तेरे कर जाये तो अच्छा।
दिल के जख्मों में दर्द होता रहता है रात भर,
मौत की मरहम से जख्म भर जाये तो अच्छा।
आतिशे इश्क ने जला दिये आशिक तमाम,
बेमौत मरने वाले गर यूं डर जाये तो अच्छा।
धर्म करने गये मगर फिर भी क़यामत आ गई,
भटके हुये वो मुसाफिर घर जाये तो अच्छा।
लाख चौरासी के चक्कर में फिर भटकेगा यही,
"गुमनाम" भव सागर से तर जाये तो अच्छा।राजेन्द्र "गुमनाम"
आतिशे इश्क =इश्क की आग 

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