सूफी गीत
कर ले सजन से बात,
वर्ना हो जाये जब रात,
बहुत पछताये गी,
कोई सुन गा तेरी पुकार,
रोये गी चिल्लाये गी।
रोये गी ...................
दिन को देख तू काये इतराये,
पल पल दिन ये ढलता जाये,
मिट्टी का साथ मिटटी के संग है,
इक दिन मिट्टी मिट्टी में मिल जाये,
जब जीती बाजी जाये हार,
रूह भी घबराये गी।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...................जय जय मां
कर ले सजन से बात,
वर्ना हो जाये जब रात,
बहुत पछताये गी,
कोई सुन गा तेरी पुकार,
रोये गी चिल्लाये गी।
रोये गी ...................
दिन को देख तू काये इतराये,
पल पल दिन ये ढलता जाये,
मिट्टी का साथ मिटटी के संग है,
इक दिन मिट्टी मिट्टी में मिल जाये,
जब जीती बाजी जाये हार,
रूह भी घबराये गी।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...................जय जय मां
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