दोस्तों ये ग़ज़ल आप के नाम
दोस्ती तुझ से रखना चाहते है,
तुम हसीं हो हम हंसना चाहते है।
हादसें इस नगरी में हो रहे हैं,
हादसों से हम बचना चाहते है।
इश्क का जयिका तो अच्छा नही है,
स्वाद फिर भी ये चखना चाहते है।
घर बने कैसे महंगाई बहुत है,
तेरे दिल में हम बसना चाहते है।
हो लिखा जिसमे जीने का तरीका,
हम किताबे वो पढ़ना चाहते है।राजेन्द्र "गुमनाम"
दोस्ती तुझ से रखना चाहते है,
तुम हसीं हो हम हंसना चाहते है।
हादसें इस नगरी में हो रहे हैं,
हादसों से हम बचना चाहते है।
इश्क का जयिका तो अच्छा नही है,
स्वाद फिर भी ये चखना चाहते है।
घर बने कैसे महंगाई बहुत है,
तेरे दिल में हम बसना चाहते है।
हो लिखा जिसमे जीने का तरीका,
हम किताबे वो पढ़ना चाहते है।राजेन्द्र "गुमनाम"
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