sufi tadka
गुरुवार, 4 जुलाई 2013
usko bhi mere
उसको भी मेरे फटे हाल पे तरस नही आता,
मैंने हजारों घिसा दी कलमें लिखते लिखते।"राजेन्द्र गुमनाम।
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