साथ रहता पर बोलता नही,
राज दिल के क्यों खोलता नही।
चेहरे से चिलमन हटा कभी,
आंख भर के क्यों देखता नही।
यूं कहे तुझसे मैं जुदा नही,
पास मेरे तू बैठता नही।
बात "रैना" की मान ले कभी,
बिन तिरे जीवन महकता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी.…………जय जय मां ।
राज दिल के क्यों खोलता नही।
चेहरे से चिलमन हटा कभी,
आंख भर के क्यों देखता नही।
यूं कहे तुझसे मैं जुदा नही,
पास मेरे तू बैठता नही।
बात "रैना" की मान ले कभी,
बिन तिरे जीवन महकता नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी.…………जय जय मां ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें