रविवार, 4 अगस्त 2013

dosti ki bqate

दोस्ती दिवस पर खास पेशकश

मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
 
 

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