दोस्ती दिवस पर खास पेशकश
मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
मत कहना मेहर रब की है,
दोस्ती तो अब मतलब की है।
कृष्ण सुदामा की वो दोस्ती,
मुद्दत पहले बातें तब की है।
शिकवा करना है कब वाजिव,
धोखा दे फितरत सब की है।
दिन रैना दोस्त बदले तेवर,
ये चिकनी मिट्टी अब की है।राजेन्द्र रैना गुमनाम"
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