मंगलवार, 20 अगस्त 2013

plkon ki chhav ne

पलकों की छांव में,सपनों के गांव में,
मजा बेसुमार है,प्यार ही प्यार यहां,
प्यार ही प्यार है प्यार ही प्यार …
दिलदारों की बस्ती मस्ती ही मस्ती है,
हर शै महंगी पर,मोहब्बत तो सस्ती है,
दिल के दरिचें खुले न कोई इन्कार है।
प्यार ही प्यार ………….
तुम आओ इस शहर में आ के तो देखो,
इक बार दिल से दिल मिला के तो देखो,
मिल जाती फिर दिल से दिल की तार है।
प्यार ही प्यार …………….
रैना"जो बची अब तो उसको संवारे गे,
पलकों की छांव में जिन्दगी गुजारे गे,
होगा न धोखा कभी हमें ये तो एतबार है।
प्यार ही प्यार……………राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ। …जय जय मां 

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