ख्वाबों का हसीन शहर वो सजाने के लिये,
दिल बेताब किसी को अपना बनाने के लिये।
मैंने सुन रखा ये क्या इसमें कुछ सच्चाई है,
इश्क में दिल होता है सिर्फ जलाने के लिये।
आजकल कल राजे दिल कोई खोलता नही,
ये हंसते दांत होते है फ़कत दिखाने के लिये।
टांगें खींचना टांगें अड़ाना जमाने की फितरत,
हाथ थामता नही अब कोई भी उठाने के लिये।
गुमनाम"समझ ली है हमने कहानी ये,सारी,
सच में अब कुछ भी बचा नही बताने के लिये। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
दिल बेताब किसी को अपना बनाने के लिये।
मैंने सुन रखा ये क्या इसमें कुछ सच्चाई है,
इश्क में दिल होता है सिर्फ जलाने के लिये।
आजकल कल राजे दिल कोई खोलता नही,
ये हंसते दांत होते है फ़कत दिखाने के लिये।
टांगें खींचना टांगें अड़ाना जमाने की फितरत,
हाथ थामता नही अब कोई भी उठाने के लिये।
गुमनाम"समझ ली है हमने कहानी ये,सारी,
सच में अब कुछ भी बचा नही बताने के लिये। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
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