वो मुझसे दूर नही है मैं भी उसके करीब हूं,
मगर उसे देख नही सकता बड़ा बदनसीब हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां
अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं,
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
बेशक वो भी इक इन्सान ही था,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
परियों का नाच देखने की हसरत,
खूद में इन्दर तलाशता रहता हूं।
मगर उसे देख नही सकता बड़ा बदनसीब हूं। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
सुप्रभात जी। ……जय जय मां
अपने अन्दर तलाशता रहता हूं,
इक समुन्दर तलाशता रहता हूं,
मोती पाने की तमन्ना पाल रखी,
बेशक वो भी इक इन्सान ही था,
खुद में सिकन्दर तलाशता रहता हूं।
परियों का नाच देखने की हसरत,
खूद में इन्दर तलाशता रहता हूं।
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