दुखी मन से लिखी रचना
भारत माता अपने हाल पे सुबक सुबक के रोती है,
सोचती बेशर्मी और बुझदिली की कोई हद होती है।
चीन सीमा में घुसता,पाकिस्तान बेख़ौफ़ दहाड़ता है,
वो सरेआम जवानों को तड़फा तड़फा कर मारता है।
कभी कभी पाकिस्तान ऐसा भी साहस दिखलाता है,
जवानों की गर्दन ही उतार कर अपने साथ ले जाता है।
मगर हमारे नेता चिकने घड़ों को कोई फर्क नही पड़ता,
क्योकि बार्डर पर इनका कोई अपना जो नही है मरता।
गिरगट घटना के बाद मेंढक बन टर टर करने लगते हैं,
शहीदों के घर झूठे आश्वासनों से जम कर भरने लगते हैं।
काश कोई सुभाष चन्द्र बोस जैसा स्वाभिमानी नेता आये,
जो धोखेबाज पाकिस्तानियों की होश को ठिकाने लगाये।
क्योकि मनमोहन सिंह जी तो अपना फर्ज ऐसे निभाते है,
पड़ोसी देशों की धमकी सुन सोनिया की गोद में छुप जाते है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
भारत माता अपने हाल पे सुबक सुबक के रोती है,
सोचती बेशर्मी और बुझदिली की कोई हद होती है।
चीन सीमा में घुसता,पाकिस्तान बेख़ौफ़ दहाड़ता है,
वो सरेआम जवानों को तड़फा तड़फा कर मारता है।
कभी कभी पाकिस्तान ऐसा भी साहस दिखलाता है,
जवानों की गर्दन ही उतार कर अपने साथ ले जाता है।
मगर हमारे नेता चिकने घड़ों को कोई फर्क नही पड़ता,
क्योकि बार्डर पर इनका कोई अपना जो नही है मरता।
गिरगट घटना के बाद मेंढक बन टर टर करने लगते हैं,
शहीदों के घर झूठे आश्वासनों से जम कर भरने लगते हैं।
काश कोई सुभाष चन्द्र बोस जैसा स्वाभिमानी नेता आये,
जो धोखेबाज पाकिस्तानियों की होश को ठिकाने लगाये।
क्योकि मनमोहन सिंह जी तो अपना फर्ज ऐसे निभाते है,
पड़ोसी देशों की धमकी सुन सोनिया की गोद में छुप जाते है। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
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