दोस्तों के लिए मौजूदा दौर ध्यान में रख
खास अंदाज
अपना स्वाभिमान भी खोना पड़ता है,
मसीहा बुझदिल हो तो रोना पड़ता है।
राजा भूल जाये जब फर्ज धर्म अपना,
फिर जनता को खाली पेट सोना पड़ता है।
सावन के महीने में तो रोते होगे सभी,
हमें आषाढ़ में दिल भिगोना पड़ता है।
चम्मचागिरी से राज काज नही चलता,
जनता का बोझ पीठ पे ढोना पड़ता है।
सोनिया से शान से कह रहे मनमोहन,
चीन का बड़ा ही सस्ता खिलौना पड़ता है।
देश का बच्चा बच्चा अब कहने लगा है,
खून का दाग खून से ही धोना पड़ता है।
गुमनाम" तू जान ले सत्य है ये कथन,
बेशर्म के साथ तो बेशर्म ही होना पड़ता है। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
खास अंदाज
अपना स्वाभिमान भी खोना पड़ता है,
मसीहा बुझदिल हो तो रोना पड़ता है।
राजा भूल जाये जब फर्ज धर्म अपना,
फिर जनता को खाली पेट सोना पड़ता है।
सावन के महीने में तो रोते होगे सभी,
हमें आषाढ़ में दिल भिगोना पड़ता है।
चम्मचागिरी से राज काज नही चलता,
जनता का बोझ पीठ पे ढोना पड़ता है।
सोनिया से शान से कह रहे मनमोहन,
चीन का बड़ा ही सस्ता खिलौना पड़ता है।
देश का बच्चा बच्चा अब कहने लगा है,
खून का दाग खून से ही धोना पड़ता है।
गुमनाम" तू जान ले सत्य है ये कथन,
बेशर्म के साथ तो बेशर्म ही होना पड़ता है। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें