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ओ मेरे भईया प्यारे तू राखी के बन्धन को निभाना,
इस बार न सौ दो सौ लूगी,पांच किलो प्याज ले आना।
सब्जी को अब मुंह न लगते बिना छोंक के दाल है खाते,
जो स्वाद दाल हो खानी तो साथ पाँव भर टमाटर लाना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
ओ मेरे भईया प्यारे तू राखी के बन्धन को निभाना,
इस बार न सौ दो सौ लूगी,पांच किलो प्याज ले आना।
सब्जी को अब मुंह न लगते बिना छोंक के दाल है खाते,
जो स्वाद दाल हो खानी तो साथ पाँव भर टमाटर लाना। राजेन्द्र रैना गुमनाम
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