दोस्तों आज की ग़ज़ल आप के नाम
दर्द मेरे दिल का जानते नही,
दिन बुरे आये पहचानते नही।
ये मसीहा क्यों समझते नही,
भूत लातों के यूं मानते नही।
यार ने मयकश तो बना दिया,
मेरे बारे क्यों अब सोचते नही।
दिल लगाना एक से अदा मेरी,
ख़ाक दर दर की हम छानते नही
झूठ से नफ़रत सच के करीब हैं,
सूत से शामियाने तानते नही।
हद असूलों में है जिन्दगी बंधी,
रैन" सीमा को हम लांघते नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
दर्द मेरे दिल का जानते नही,
दिन बुरे आये पहचानते नही।
ये मसीहा क्यों समझते नही,
भूत लातों के यूं मानते नही।
यार ने मयकश तो बना दिया,
मेरे बारे क्यों अब सोचते नही।
दिल लगाना एक से अदा मेरी,
ख़ाक दर दर की हम छानते नही
झूठ से नफ़रत सच के करीब हैं,
सूत से शामियाने तानते नही।
हद असूलों में है जिन्दगी बंधी,
रैन" सीमा को हम लांघते नही। राजेन्द्र रैना गुमनाम"
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