मंगलवार, 13 अगस्त 2013

neta hota hai

दोस्तों देखिये मेरी  लेखनी का अंदाज

जवान होता सीमा पे मरने के लिये,
नेता होता अपना घर भरने के लिये।
पाकिस्तान है हमला करने के लिये,
भारत के प्रधानमंत्री हैं डरने के लिये।
वाड्रा को लेकर बेवजह मजा है शोर,
दामाद तो होता माल रगड़ने के लिये।
नेता देखिये किस कद्र बदलते हैं रंग,
नीतिश बेताब हाथ पकड़ने के लिये।
लालू की अर्जी तभी ख़ारिज हो गई,
इनाम मिले पशु चारा चरने के लिये।
मुन्नी बाई शीला खूब मशहूर हो गई,
फिल्मों में बचा न कुछ करने के लिये।
बाबा के उपदेश पे जनता करे अमल,
बाबा होते सिर्फ कथा पढ़ने के लिये।
राजनीति में चम्मचागिरी आम बात,
नेता का माथा होता है रगड़ने के लिये।
पढ़ लिख कर डिग्री लिए घूमता गरीब,
पैसे बिना चारा न आगे बढ़ने के लिये।
"गुमनाम"से खफा है तू किसलिए बता,
तू और कितने गम देगा जरने के लिये। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"




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