मंगलवार, 13 अगस्त 2013

 दोस्तों नारी जाति को ध्यान में रख कर,
एक कविता लिखी गई है,यदि महिला मित्र चाहे गी
 मैं तभी इसे पोस्ट करु गा।
इस कविता का मुखड़ा लिख रहा हूं. कोमेट्स जरुर करे

       कविता      नारी 
अब उठ री नारी बावली मत न तू श्रृंगार कर,
वक्त है विपरीत खुद को युद्ध के लिए तैयार कर।राजेन्द्र रैना गुमनाम"

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