दोस्तों के नाम छोटी बहर की ग़ज़ल
बिस्मिल मिरा ये दिल,
जीना हुआ मुश्किल।
वो जान का दुश्मन,
है गाल पे जो तिल।
यूं देख कर हालत,
खिल खिल हंसे कातिल।
वो दरद आहें आंसू,
है इश्क में हासिल।
मझदार में भटके,
है दूर वो साहिल।
गर चाह कुरसी की,
"गुमनाम" हो जाहिल। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
बिस्मिल मिरा ये दिल,
जीना हुआ मुश्किल।
वो जान का दुश्मन,
है गाल पे जो तिल।
यूं देख कर हालत,
खिल खिल हंसे कातिल।
वो दरद आहें आंसू,
है इश्क में हासिल।
मझदार में भटके,
है दूर वो साहिल।
गर चाह कुरसी की,
"गुमनाम" हो जाहिल। राजेन्द्र रैना "गुमनाम"
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