रविवार, 18 अगस्त 2013

mahfil ae jjbat

महफ़िल ए जज्बात में आ के तो देख,
सूरत बदल जाये दिल लगा के तो देख।
चिराग बुझाना तो बहुत आसां है यारा,
तू गरीब के घर चिराग जला के तो देख।
ख्वाबों में महल बनाना मुश्किल नही है,
जमीन पे तू इक कमरा बना के तो देख।
दूसरों के घरों पे अक्सर उठाता है उंगली,
अपने घर के अंदर कभी जा के तो देख।
तीर्थ नहाने से न मिलती मन की शांति,
मां बाप के चरणों में सिर झुक के तो देख।  
गुलशन में गुल खिलते हैं तमाम लेकिन,
"रैना"मन का गुलाब तू खिला के तो देख।राजेन्द्र रैना गुमनाम
सुप्रभात के साथ इक रचना। … जय जय मां     

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