इस ओर उस पार चले,
तेरी ही तो सरकार चले।
मेरे बारे सोच तू करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है औरत की,
जिससे ये घर बाहर चले।
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।
तेरी ही तो सरकार चले।
मेरे बारे सोच तू करले,
क्यों जीते जी मार चले।
मेहरबानी है औरत की,
जिससे ये घर बाहर चले।
जीते जी कोई कदर नही,
मरे संग अपने यार चले।
चारागर बेवफा निकला,
मायूस हो के बीमार चले।
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