आज की आखिरी पेशकश प्यार के साथ
राजे दिल बताते क्यों नही,
भ्रम अब मिटाते क्यों नही।
खुश हो क्या पर्दे में रह कर,
चिलमन को हटाते क्यों नही।
तू हसीं तेरे जलवें हसीन हैं,
तुम नजारा दिखाते क्यों नही।
तू गरीबों का हमदर्द मेरे दोस्त,
घर मिरे तुम आते क्यों नही।
रोशन हो मेरी अँधेरी दुनिया,
इश्क की शमा जलाते क्यों नही।
"गुमनाम"के चक्कर खत्म हो,
रास्ता मंजिल का बताते क्यों नही।"राजेन्द्र गुमनाम"
राजे दिल बताते क्यों नही,
भ्रम अब मिटाते क्यों नही।
खुश हो क्या पर्दे में रह कर,
चिलमन को हटाते क्यों नही।
तू हसीं तेरे जलवें हसीन हैं,
तुम नजारा दिखाते क्यों नही।
तू गरीबों का हमदर्द मेरे दोस्त,
घर मिरे तुम आते क्यों नही।
रोशन हो मेरी अँधेरी दुनिया,
इश्क की शमा जलाते क्यों नही।
"गुमनाम"के चक्कर खत्म हो,
रास्ता मंजिल का बताते क्यों नही।"राजेन्द्र गुमनाम"
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