दोस्तों की ऩजर
मेरा साथी नही कोई इस जमाने में,
तुझे भी मजा आता मुझे रूलाने में।
पास रह कर भी दूरी बना के रखता,
क्या शर्म आती है चेहरा दिखाने में।
तू खुद ही करता है करवाता मुझसे,
फिर क्यों उलझा देता मुझे बहाने में।
करने लगता है कभी मौत का तांडव,
खुद ही लग जाता फिर तू बचाने में।
मेरी तरफ कभी नजरे इनायत कर दे,
क्यों लगा रहता"गुमनाम"को सताने में।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ..................जय जय मां
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