दोस्तों दिल पे हाथ रख के पढ़ना
तड़फते है हम मगर वो सुनते ही नही,
अफ़सोस पैरों से कांटें चुनते ही नही।
दिल दे दिया है अब जान भी उन्ही की,
फिर भी हंस के वो हमें मिलते ही नही।
गुलशन में बहारें आई रूखों पे जवानी हैं,
मेरे मन के फूल फिर भी खिलते ही नही।
रुप हुश्न दौलत का गुमान न कीजिये,
जो नीचे देख चलते वो तो गिरते ही नही।
प्यार से हमको चाहे कोई भी खरीद ले,
गुमनाम" हम तो पैसे से बिकते ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम "
तड़फते है हम मगर वो सुनते ही नही,
अफ़सोस पैरों से कांटें चुनते ही नही।
दिल दे दिया है अब जान भी उन्ही की,
फिर भी हंस के वो हमें मिलते ही नही।
गुलशन में बहारें आई रूखों पे जवानी हैं,
मेरे मन के फूल फिर भी खिलते ही नही।
रुप हुश्न दौलत का गुमान न कीजिये,
जो नीचे देख चलते वो तो गिरते ही नही।
प्यार से हमको चाहे कोई भी खरीद ले,
गुमनाम" हम तो पैसे से बिकते ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम "
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