मौसम के मुताबिक रचना
आप दोस्तों की महफ़िल में
चमकी बिजली तो होश खो दिये,
बरसी बरसात तो हम भी रो दिये।
रोगे इश्क दिल को लगा के हमने,
अपनी राहों पे खुद कांटे बो दिये।
उनसे बिछुड़े तो हम पे ऐसी गुजरी,
छोटे बच्चे ने जैसे चार आने खो दिये।
मेरी बरबादी पे खुदा छम छम रोया,
उसने आंसुओं से गुलाब बिगो दिये।
गुमनाम"को जीवन रास नही आया,
ले ले साँस वापिस जो मुझ को दिये।"राजेन्द्र गुमनाम"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें