बुधवार, 5 जून 2013

netao ke wyawahar se

नेताओं के व्यवहार से दुखी जनता सारी है,
अब तो ज्वालामुखी के फटने की तैयारी है।
हर इक सीने में दर्द दबा हुआ इक तूफान है,
दिल की खूनी लहरों में आया हुआ उफान है,
बुझदिली कब इन भारतियों की पहचान है,
देश के खातिर मर मिटना  हमारी शान है।
बेशक हमें सिर्फ इक सीमा का ही ध्यान है,
जब ये काले अंग्रेज हर सीमा लाँघ जाये गे,
भारत मां के दीवाने बसंती चोले रंगवाये गे,
हाथ में तिरंगा ले इंकलाब के नारें लगाये गे।
भारत माता फिर से आजाद करवाये गे।गुमनाम"

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