नीचे देख कर चलता ही नही,
हालत अपनी देखता ही नही।
मन्जिल कहां किधर है जाना,
इस बारे कुछ सोचता ही नही।
दौलत के लिए कुछ भी कर दे,
बढ़ते कदमों को रोकता ही नही।
मां का भक्त दीवाना मन्दिरों का,
घर बैठी मां को पूछता ही नही।
नसीहत देता अक्सर औरों को,
खुद को तो कभी टोकता ही नही।
गुमनाम"कुत्ता अपने मालिक का,
मग्न मस्ती में भौकता ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...........जय जय मां
हालत अपनी देखता ही नही।
मन्जिल कहां किधर है जाना,
इस बारे कुछ सोचता ही नही।
दौलत के लिए कुछ भी कर दे,
बढ़ते कदमों को रोकता ही नही।
मां का भक्त दीवाना मन्दिरों का,
घर बैठी मां को पूछता ही नही।
नसीहत देता अक्सर औरों को,
खुद को तो कभी टोकता ही नही।
गुमनाम"कुत्ता अपने मालिक का,
मग्न मस्ती में भौकता ही नही।राजेन्द्र "गुमनाम"
सुप्रभात जी ...........जय जय मां
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