दोस्तों सूफी गीत आप की महफ़िल में
हर महफ़िल में तेरी चर्चा मस्जिद ओ बुतखाने में,
तू हंसीन खूबसूरत कोई तुझ सा नही जमाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................
उगते सूरज की लाली दिन की दोपहर भी हसीं शाम तू,
जिसको पीने को मन तरसे भरा अमृत कलश जाम तू,
एक है तू तेरे नाम बहुत अल्ला राम रहीम घनश्याम तू,
मन माने तो सब कुछ तू ही गर न मानो तो गुमनाम तू,
हर पल तू लगा रहता हैं बेसुमार अपने जलवें दिखाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................गुमनाम"
हर महफ़िल में तेरी चर्चा मस्जिद ओ बुतखाने में,
तू हंसीन खूबसूरत कोई तुझ सा नही जमाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................
उगते सूरज की लाली दिन की दोपहर भी हसीं शाम तू,
जिसको पीने को मन तरसे भरा अमृत कलश जाम तू,
एक है तू तेरे नाम बहुत अल्ला राम रहीम घनश्याम तू,
मन माने तो सब कुछ तू ही गर न मानो तो गुमनाम तू,
हर पल तू लगा रहता हैं बेसुमार अपने जलवें दिखाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................गुमनाम"
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