शनिवार, 1 जून 2013

ar mhfilme teri

दोस्तों सूफी गीत आप की महफ़िल में

हर महफ़िल में तेरी चर्चा मस्जिद ओ बुतखाने में,
तू हंसीन खूबसूरत कोई तुझ सा नही जमाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................
उगते सूरज की लाली दिन की दोपहर भी हसीं शाम तू,
जिसको पीने को मन तरसे भरा अमृत कलश जाम तू,
एक है तू तेरे नाम बहुत अल्ला राम रहीम घनश्याम तू,
मन माने तो सब कुछ तू ही गर न मानो तो गुमनाम तू,
हर पल तू लगा रहता हैं बेसुमार अपने जलवें दिखाने में।
कोई तुझ सा नही ..............................................गुमनाम"

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