मिट्टी के घर हैं खाली खाली,
फिर ये बात तो सोचने वाली,
घर के मालिक को कोई न बुलाता है,
हर कोई इस घर को अपना बताता है।
अपना बताता इसे अपना............
भूल गया कसमें तोड़ दिये वादे,
बहारों को देख कर बदले इरादे,
आईने को देख कर इतराता है।
अपना बताता इसे अपना............
गुमनाम"ये बता क्या मजबूरी है,
घर के मालिक से कर ली दूरी है,
उसकी सुनता न तू अपनी चलाता है।
अपना बताता इसे अपना.........राजेन्द्र"गुमनाम"
सुप्रभात जी .............जय जय मां
फिर ये बात तो सोचने वाली,
घर के मालिक को कोई न बुलाता है,
हर कोई इस घर को अपना बताता है।
अपना बताता इसे अपना............
भूल गया कसमें तोड़ दिये वादे,
बहारों को देख कर बदले इरादे,
आईने को देख कर इतराता है।
अपना बताता इसे अपना............
गुमनाम"ये बता क्या मजबूरी है,
घर के मालिक से कर ली दूरी है,
उसकी सुनता न तू अपनी चलाता है।
अपना बताता इसे अपना.........राजेन्द्र"गुमनाम"
सुप्रभात जी .............जय जय मां
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