रविवार, 9 जून 2013

jane wala de gya

दोस्तों हाथ रुक नही रहे लिखता जा रहा हूं
स्वीकार करे ये रचना

जाने वाला दे गया आंखों का पानी,
मेरे लिये तोहफा दोस्त की निशानी।
जिस हाल में रखे ये तो उसकी मर्जी,
नाम उसके ही कर दी मैंने जिंदगानी।
इश्क में दिल पे कोई जोर नही चलता,
गलियों में नाचती फिरे मीरा दीवानी।
हर तरफ नज़र आते हैं हसीन जलवें,
झूम के चढ़ती जब बेपरवाह जवानी।
बस इक यही तो तमन्ना हसरत मेरी,
आशिक"गुमनाम"की बने कोई कहानी।"राजेन्द्र गुमनाम"

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