रविवार, 9 जून 2013

gairo ko apna bnate sbhi

sun day spacial दोस्तों की महफ़िल में

 गैरों को अपना बनाते सभी,
अपनों को अपना बनाते नही,
करते वादा हम जान दे दे गे,
पर अमल कर के दिखाते नही।
शीशे के घर नजर आते सबके,
कोई बोले तो फिर क्यों बोले,
सोने दो जो सो रहा तान के लंबी,
शहर वाले किसी को जगाते नही।
भारत देश की बदकिस्मती देखो,
मसीहा हो गये निपट भ्रष्टाचारी,
नेता के दांत बिलकुल हाथी जैसे,
जो खाते वो तो नज़र आते नही।
गुमनाम" है तू तुझे क्या लेना,
दुनिया बदल रही चोंगा अपना,
इस बात का तो तू ध्यान रखना,
किसी उठते को कभी गिराते नही।"राजेन्द्र गुमनाम"

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