मंगलवार, 11 जून 2013

tere shar

दोस्तों की महफ़िल में प्याला ए दर्द।

इस तेरे शहर में ठिकाना न मिला,
जिन्दगी जीने का बहाना न मिला।
दिल के जख्मों ने हमें जीने न दिया,
अफ़सोस मौत का नजराना न मिला।
मतलब की हो गई अब सारी दुनिया,
मण्डी में बिन पैसे याराना न मिला।
छुपा के रखते कहां खजाना ए गम,
मुझको कोई ऐसा तहखाना न मिला।
गुमनाम"को शिकवा यही शिकायत है,
सारे शहर में कोई भी बेगाना न मिला।"राजेन्द्र "गुमनाम"

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