दोस्तों मेरी ये रचना शीघ्र ही
सुनने को मिले गी,आप का क्या ख्याल
हंस के मेरी तरफ देखो,
दिल का जख्म भर जाये गा,
फिर तुझे बेवफा कह कर,
कोई हरगिज न आंसू बहाये गा।
कौन देखता अब मिट्टी के घर को,
शीश महलों पे ऩजर सबकी,
"गुमनाम"मुसाफिर हम शहर के,
मेरा नाम तेरी जुबां पे न आये गा।"गुमनाम"
सुनने को मिले गी,आप का क्या ख्याल
हंस के मेरी तरफ देखो,
दिल का जख्म भर जाये गा,
फिर तुझे बेवफा कह कर,
कोई हरगिज न आंसू बहाये गा।
कौन देखता अब मिट्टी के घर को,
शीश महलों पे ऩजर सबकी,
"गुमनाम"मुसाफिर हम शहर के,
मेरा नाम तेरी जुबां पे न आये गा।"गुमनाम"
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