sufi tadka
सोमवार, 3 जून 2013
koi khta
माहताब कहता कोई आफ्ताब हो गया हूं,
सच मानो तो गणित की किताब हो गया हूं,
हल नही कर पा रहा मैं जिन्दगी का सवाल,
"गुमनाम"परेशान दुखी बेहिसाब हो गया हूं।"गुमनाम"
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