शनिवार, 15 जून 2013

bhartiya saskriti ka

भारतीय संस्कृति का ????
निकलता ?????
जनाजा देखिये,
हर शहर गांव में ??????
वृद्दआश्रम ??????
और वहां बुजुर्गों की भीड़।?गुमनाम"

दोस्तों रचना का नया  रंग कैसा लगा

अफ़सोस अब  न शरमाते बच्चें,
मां बाप पे ही हुक्म चलाते बच्चें।
अपनी हर जिद्द मनवाने के लिए,
मरने की धौंस भी दिखाते बच्चें।
अधिकतर तो कामचोर हो गये हैं,
काम को हाथ न अब लगाते बच्चें।
अपनों को एकदम भूलते ही जा रहे,
फोन नेट से तालमेल बिठाते बच्चें।
बच्चों की समझदारी तो बाकमाल है,
सबकुछ पेट में सीख कर आते बच्चें।
बेशक इनको सम्भालना ही होगा,
जीवन की बगिया को महकाते बच्चें।
बच्चों के साथ मैं अब बच्चा हो गया,
"गुमनाम"को बिलकुल न सताते बच्चें।"गुमनाम"

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