दोस्तों गुस्ताखी माफ़
मैं शराब को अच्छा कैसे कह दू,
इसने तो लाखों के घर उजाड़े हैं,
यूं रिन्द रहे होगे चाहे मस्ती में,
मय ने औरत बच्चों पे कहर गुजारे हैं।"रैना"
मैं शराब को अच्छा कैसे कह दू,
इसने तो लाखों के घर उजाड़े हैं,
यूं रिन्द रहे होगे चाहे मस्ती में,
मय ने औरत बच्चों पे कहर गुजारे हैं।"रैना"
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