sufi tadka
मंगलवार, 28 मई 2013
teri murt ko dil
अफ़सोस ये अपना बना न पाये,
गम है तुझे दिल से हटा न पाये,
यूं आग ने घर को जला दिया है,
हम दीप उल्फत का जला न पाये।"रैना"
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