बुधवार, 29 मई 2013

sham dhlte hi

सूफी गीत

शाम ढलते  ही,दीप जलते ही,
याद तेरी आयेये,जान मेरी जायेये।
मन्दिरों में गूंजे घंटी,
मस्जिद में आजान हुई,
याद तेरी तब देखो तो,
मुझ पे मेहरबान हुई,
बोली कसमें पूछे वादे,
ये बता क्यों बदले इरादे,
गौर करे उन बातों पे,रूह मेरी घबरायेये "रैना"

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