सूफी गीत
शाम ढलते ही,दीप जलते ही,
याद तेरी आयेये,जान मेरी जायेये।
मन्दिरों में गूंजे घंटी,
मस्जिद में आजान हुई,
याद तेरी तब देखो तो,
मुझ पे मेहरबान हुई,
बोली कसमें पूछे वादे,
ये बता क्यों बदले इरादे,
गौर करे उन बातों पे,रूह मेरी घबरायेये "रैना"
शाम ढलते ही,दीप जलते ही,
याद तेरी आयेये,जान मेरी जायेये।
मन्दिरों में गूंजे घंटी,
मस्जिद में आजान हुई,
याद तेरी तब देखो तो,
मुझ पे मेहरबान हुई,
बोली कसमें पूछे वादे,
ये बता क्यों बदले इरादे,
गौर करे उन बातों पे,रूह मेरी घबरायेये "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें