दोस्तों ये साधारण ग़ज़ल आप की नजर
जो बुझदिल लव कैसे खोले,
जिसमें हिम्मत वो सच बोले।
जिसकी फितरत में धोखा है,
वो तो अक्सर ही कम तोले।
मुसिबत को जिसने परखा है,
वो मुश्किल में है कब डोले।
बीमारी से जो बचना हैं,
तू हाथों को मल के धो ले।
जिसने बख्शा ये घर सुन्दर,
"रैना" तू भी उसका होले। "रैना"
जो बुझदिल लव कैसे खोले,
जिसमें हिम्मत वो सच बोले।
जिसकी फितरत में धोखा है,
वो तो अक्सर ही कम तोले।
मुसिबत को जिसने परखा है,
वो मुश्किल में है कब डोले।
बीमारी से जो बचना हैं,
तू हाथों को मल के धो ले।
जिसने बख्शा ये घर सुन्दर,
"रैना" तू भी उसका होले। "रैना"
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