sufi tadka
शुक्रवार, 31 मई 2013
मैं जो चमकना चाहता हूं तो मेरी क्या गलती,
इक जर्रा भी आफ्ताब बनने की ख्वाहिश रखता है।"गुमनाम"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें