दोस्तों की महफ़िल में अपनी मज़बूरी
ये शहर जंगल बियाबान हो गया,
आदमखोर अब इन्सान हो गया।
जानवर तो बा असूल नही बदले,
बदल गया आदमी हैवान हो गया।
कल युग का ये कैसा असर देखो,
वक्ता ही अब गुरु भगवान हो गया।
दावे करता है ईमानदारी के बहुत,
मौका लगते ही बेईमान हो गया।
रहना खाना बच्चों की पढ़ाई शादी,
महंगाई में बन्दा परेशान हो गया।
जीते जी गिद्द नोच रहे मास देखो,
दर्द सहता "रैना"बेजुबान हो गया।"रैना"
ये शहर जंगल बियाबान हो गया,
आदमखोर अब इन्सान हो गया।
जानवर तो बा असूल नही बदले,
बदल गया आदमी हैवान हो गया।
कल युग का ये कैसा असर देखो,
वक्ता ही अब गुरु भगवान हो गया।
दावे करता है ईमानदारी के बहुत,
मौका लगते ही बेईमान हो गया।
रहना खाना बच्चों की पढ़ाई शादी,
महंगाई में बन्दा परेशान हो गया।
जीते जी गिद्द नोच रहे मास देखो,
दर्द सहता "रैना"बेजुबान हो गया।"रैना"
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