मां को समर्पित चंद लाइनें
मां ने गले लगा जब चूमा माथा,
हर गम की मिली दवा मुझको,
ढूंढ़ता रहा जिसे मन्दिर मस्जिद,
घर में मिल गया वो खुदा मुझको।
ये हुआ मेरी मां की दुआ का असर,
अब छूती नही गरम हवा मुझको।
गुलशन ऐ जिन्दगी महकने लगा है,
रास आ गई है मां की रजा मुझको।
"रैना" सच कहता दिल पे हाथ रख के,
मां की वजह नसीब फ़िजा मुझको।"रैना"
मां ने गले लगा जब चूमा माथा,
हर गम की मिली दवा मुझको,
ढूंढ़ता रहा जिसे मन्दिर मस्जिद,
घर में मिल गया वो खुदा मुझको।
ये हुआ मेरी मां की दुआ का असर,
अब छूती नही गरम हवा मुझको।
गुलशन ऐ जिन्दगी महकने लगा है,
रास आ गई है मां की रजा मुझको।
"रैना" सच कहता दिल पे हाथ रख के,
मां की वजह नसीब फ़िजा मुझको।"रैना"
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