वाह रे तेरी कारागरी कमाल बा कमाल है,
समझ न सका कोई ये कैसी तेरी चाल है।
किसी को आज तक मिल न पाया जवाब है,
अनबुझ पहेली ऐसी मुश्किल बड़ा सवाल है।
तेरे हुस्न के चेर्चे होते हर इक महफ़िल में,
हर इक शै पर शबाब चढ़ा तेरा ही जमाल है।
बेशक ये सच"रैना"उसके आशिक मस्ती में,
जो भी उससे दूर है रहता उसका बुरा हाल है।"रैना"
सुप्रभात जी ......................जय जय मां
समझ न सका कोई ये कैसी तेरी चाल है।
किसी को आज तक मिल न पाया जवाब है,
अनबुझ पहेली ऐसी मुश्किल बड़ा सवाल है।
तेरे हुस्न के चेर्चे होते हर इक महफ़िल में,
हर इक शै पर शबाब चढ़ा तेरा ही जमाल है।
बेशक ये सच"रैना"उसके आशिक मस्ती में,
जो भी उससे दूर है रहता उसका बुरा हाल है।"रैना"
सुप्रभात जी ......................जय जय मां
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