आसां जिन्दगी का सफर नही होता,
यूं गम से बचा कोई बशर नही होता।
तेरी दीद को तड़फ रहा ये दिल मेरा,
तुझे देखे बिन अब सबर नही होता।
खुदा की होती है खास ही मेहरबानी,
बेशक बातों में यूं असर नही होता।
आलिशान महल बना दिये लोगों ने,
वो बेघर उसका कोई घर नही होता।"रैना"
यूं गम से बचा कोई बशर नही होता।
तेरी दीद को तड़फ रहा ये दिल मेरा,
तुझे देखे बिन अब सबर नही होता।
खुदा की होती है खास ही मेहरबानी,
बेशक बातों में यूं असर नही होता।
आलिशान महल बना दिये लोगों ने,
वो बेघर उसका कोई घर नही होता।"रैना"
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